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Monday, 31 August 2020
युवक ने दिखाई 'दबंगई', युवती को दी धमकी- तेरे नाम की चिट्ठी लिखकर मैं अपनी जान दे दूंगा
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तस्वीरें: देह व्यापार के धंधे से शर्मसार हुआ मोहल्ला, घर का दरवाजा खोलते ही दंग रह गई पुलिस
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देश के 660 सेंटर्स पर परीक्षा दे रहे करीब 8 लाख स्टूडेंट्स, थर्मल स्क्रींनिंग के साथ मिली एंट्री, 6 सितंबर तक ऑनलाइन मोड में आयोजित हो रही परीक्षा
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से आज यानी एक सितंबर से जेईई मेन परीक्षा देशभर में आयाेजित की जा रही है। यह परीक्षा देशभर में 660 परीक्षा सेंटर में 6 सितंबर तक आयोजित होगी। विपक्षी दलों और कुछ छात्रों के विरोध के बावजूद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) में प्रवेश के लिए JEE मेन, मंगलवार को कोरोना के बीच आखिरकार शुरू हो गई ।
एडमिड कार्ड भी हुए सैनिटाइज
आज से शुरू हुई परीक्षा के दाैरान देश के अलग-अलग राज्यों से परीक्षा में अलग तरह का नजारा देखने को मिले। कोरोना के चलते एनटीए की तरफ से जारी गाइडलाइंस का ध्यान रखा गया। स्टूडेंट्स को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर एंट्री कराई गई। सेंटर के अंदर छात्रों को मॉस्क उपलब्ध कराया गया और उनके एडमिड कार्ड सैनिटाइज किए गए। परीक्षा के दौरान ना फुल आस्तीन नजर आई ना हाई हील। सभी कैंडिडेट्स गाइडलाइंस का पालन करते हुए ही सेंटर्स पहुंचे।
इन राज्यों में स्टूडेंट्स को मिलेंगी ये सुविधाएं
मध्य प्रदेश में मुफ्त यातायात : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जेईई और नीट के स्टूडेंट्स के लिए यातायात के मुफ्त साधन उपलब्ध कराने की घाेषणा की है। इसके लिए स्टूडेंट्स 181 पर कॉल कर सकते हैं।
उड़ीसा में मिलेंगी ये सुविधाएं : उड़ीसा सरकार ने स्टूडेंट्स काे मुफ्त यातायात और ठहरने की सुविधा मुहैया करवाने की घोषणा की है। छत्तीसगढ़ में हुआ सुविधाओं का ऐलान : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्टूडेंट्स काे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने और वापस भेजने की व्यवस्थाएं कराने काे कहा है।
झारखंड में एक महीने का अनलॉक: झारखंड सरकार ने 30 सितंबर तक एक महीने के लिए राज्य में सार्वजनिक परिवहन, होटल, लॉज और रेस्तरां को दोबारा खोलने की अनुमति दी है। जेईई-नीट के दौरान, अन्य राज्यों से आने और जाने वाले कैंडिडेट्स को 14 दिन के क्वारैंटाइन से छूट दी जाएगी।
सुरक्षा के मद्देनजर परीक्षा में किए गए बदलाव
- दिए गए टाइम स्लॉट में परीक्षा केंद्र पहुंचे स्टूडेंट्स
- जेईई की एक पाली में एक लाख 32 हजार की जगह अब 85 हजार अभ्यर्थी बैठे।
- जेईई मेन के लिए परीक्षा केंद्र 570 से बढ़ाकर 660 किए गए।
- एक-दूसरे से छह फीट की दूरी बनाकर रखनी होगी।
- जेईई में एक-एक सीट छोड़कर छात्रों को बिठाया।
- फ्रिस्किंग, डॉक्यूमेंट की वेरिफिकेशन का काम रजिस्ट्रेशन रूम के अंदर किया गया।
- कोरोना के लक्षण होने पर आइसोलेशन रूम में देनी होगी परीक्षा।
- कैंडिडेट्स को परीक्षा केंद्र में नया मास्क दिया गया।
- मुंह पर मास्क और हाथों में दस्ताने पहनना अनिवार्य।
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कलियुगी बाप: बच्चे को रोने की वजह से दी दर्दनाक मौत, सीने पर लात मारकर कर उतारा मौत के घाट
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जन्मदिन की पार्टी मनाने जा रहा था युवक, आरोपियों ने रास्ते में पीटा फिर किरच से किया वार, मौत
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बटाला में कबड्डी खिलाड़ी की हत्या, पांच पुलिसकर्मी समेत छह गिरफ्तार, एक सीएम सुरक्षा में है तैनात
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पिता ने नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म कर फंदा लगाकर दी जान
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IIT दिल्ली 5 अक्टूबर से शुरू करेगा JEE Advance AAT के रजिस्ट्रेशन, परीक्षा 8 अक्टूबर को होगी
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ( IIT) दिल्ली, आर्किटेक्चर के ग्रेजुएशन कोर्स में एडमिशन के लिए होने वाली JEE Advance AAT परीक्षा की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 5 अक्टूबर से शुरू कर रहा है।
रजिस्ट्रेशन करने के लिए स्टूडेंट्स के पास सिर्फ 2 दिन का समय होगा। 6 अक्टूबर तक ही इस परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं।
जेईई एडवांस क्वालिफाय करना जरूरी
JEE Advance AAT में आवेदन करने के लिए कैंडिडेट का JEE Advance परीक्षा क्वालिफाय करना जरूरी है। आर्किटेक्चर एप्टीट्यूड टेस्ट ( AAT) में आए स्कोर के आधार पर ही स्टूडेंट्स के आईआईटी खड़गपुर, आई
आईटी रुड़की और आईआईटी बीएचयू के बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर ( B.Arch) कोर्स में एडमिशन मिलेगा।
3 घंटे का होगा पेपर
JEE Advance AAT परीक्षा में कैंडिडेट का 3 घंटे का पेपर सॉल्व करना होता है। ये पेपर कैंडिडेट को अंग्रेजी में ही अटेम्प्ट करना होता है। हिंदी चुनने का कोई विकल्प नहीं है।
27 सितंबर को होगी जेईई एडवांस परीक्षा
देश भर में जेईई एडवांस परीक्षा 27 सितंबर को आयोजित होनी है। जेईई मेन्स परीक्षा में पहले 2.5 लाख रैंक हासिल करने वाले स्टूडेंट्स जेईई एडवांस में शामिल हो सकते हैं। वहीं जेईई एडवांस क्वालिफाय करने वाले कैंडिडेट्स आर्किटेक्ट एप्टीट्यूड टेस्ट के लिए आवेदन कर सकेंगे। जेईई एडवांस का रिजल्ट 5 अक्टूबर को घोषित होगा। इसी दिन आर्किटेक्ट की प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी।
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मिर्जापुर: बेटा ही निकला पिता का कातिल, हत्या करने की वजह का पुलिस ने किया खुलासा
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विदेश से कमाकर लौट रहा था युवक, नहीं पता था इस हाल में पहुंचेगा घर
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जम्मू-कश्मीरः रियासी में लश्कर-ए-तैयबा के तीन मददगार गिरफ्तार, पूछताछ में जुटी पुलिस
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यूपी: तीन दिन पहले घर से गायब हुई छात्र की हत्या, कुए में शव मिलने से हड़कंप
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ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी में एडमिशन के लिए आज शाम 5 बजे तक करें आवेदन, एक ही फॉर्म भरकर अलग-अलग कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं
दिल्ली यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी के विभिन्न कोर्सेस में एडमिशन के लिए आवेदन करने की आज यानी 31 अगस्त अंतिम तारीख है। शाम 5 बजे तक यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट पर स्टूडेंट्स आवेदन कर सकते हैं।
यह प्रक्रिया सिर्फ उन कोर्सेस के लिए है, जिनमें मैरिट के स्कोर पर एडमिशन होना है। जिन कोर्सेस में एंट्रेंस के जरिए एडमिशन होना था। उनकी आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
एक फॉर्म भरकर कई कोर्स में आवेदन कर सकते हैं
दिल्ली यूनिवर्सिटी इस साल ‘सिंगल फॉर्म’ मेथड के जरिए एडमिशन दे रहा है। यानी अलग-अलग कोर्स के लिए भी कैंडिडेट को एक ही फॉर्म भरना होगा। कट-ऑफ जारी होने के बाद स्टूडेंट्स जिस कोर्स में चाहे उसके लिए आवेदन कर सकेगा।
5 स्टैप्स में समझें आवेदन करने का तरीका
- सबसे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट http://www.du.ac.in विजिट करें
- पहले से रजिस्टर्ड हैं तो इमेल आई़डी के जरिए लॉग इन करें। अगर रजिस्टर्ड नहीं हैं तो बाईं तरफ रजिस्ट्रेशन करने का विकल्प होगा। वहां से रजिस्ट्रेशन करें।
- रजिस्ट्रेशन में बताना होगा कि आपने 12वीं कक्षा सीबीएसई बोर्ड से दी है या फिर किसी अन्य बोर्ड से। सही जवाब पर क्लिक करें।
- अब आपके सामने एक फॉर्म ओपन होगा। जहां पर्सनल डिटेल्स भरनी हैं। इसमें 12वीं का रोल नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जन्म तिथि जैसी जानकारी शामिल हैं।
- डिटेल्स भरने के बाद रजिस्टर्ड बटन पर क्लिक करें। फिर दोबारा वेबसाइट विजिट कर अपनी इमेल आईडी के जरिए लॉग इन करने के बाद एडमिशन के लिए आवेदन करें।
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यूपी: वाराणसी में चोरों ने घर से साफ की दो लाख से ज्यादा की नकदी और 13 लाख का सोना-चांदी
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जम्मूः फर्जी दस्तावेजों से अपने नाम करवा ली 108 कनाल सरकारी जमीन, पांच लोग नामजद
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Sunday, 30 August 2020
इंडियन ऑयल कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर का शव चेन से लटकता मिला, देख नौकरानी की निकली चीख
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अमृतसरः एनआरआई से डेढ़ करोड़ की ठगी का आरोप, नवजोत सिद्धू के करीबी होटल कारोबारी पर केस
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वाराणसी: चाइनीज मांझे ने मासूम बच्ची की छीन ली जिंदगी, प्रतिबंधित होने पर आसानी से मिलता है ये जानलेवा धागा
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क्या 'इस्लामिक स्टडीज' की वजह से UPSC क्लियर करने वाले मुस्लिम कैंडिडेट्स की संख्या बढ़ रही है ? पड़ताल में जानिए क्या है पूरा सच
केंद्रीय लोक सेवा आयोग ( UPSC) ने 4 अगस्त को सिविल सर्विसेज परीक्षा 2019 के परिणाम जारी किए। इसमें 829 कैंडिडेट्स सफल हुए।
सफल कैंडिडेट्स की संख्या के अलावा एक और आंकड़ा बहुत चर्चा में रहा। वह था परीक्षा में सफल होने वाले मुस्लिम कैंडिडेट्स की संख्या के बढ़ने का आंकड़ा।
पिछले साल यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा 28 मुस्लिम उम्मीदवारों ने पास की थी। 2019 परीक्षा के परिणामों में ये संख्या बढ़कर 42 हो गई है। इसे 40 फीसदी बढ़त बताया जा रहा है।
मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता का आंकड़ा आने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है। इस बहस में ‘यूपीएससी जिहाद’ शब्द का खूब इस्तेमाल हो रहा है। बहस के तार जुड़े हैं ‘इस्लामिक स्टडीज’ नाम के एक विषय से। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि इस्लामिक स्टडीज के चलते ही यूपीएससी में सफल होने वाले मुस्लिम उम्मीदवारों की संख्या बढ़ रही है। लिहाजा इस विषय को सिलेबस से हटाया जाना चाहिए।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भाजपा के राज्यसभा सदस्य हरनाथ सिंह यादव ने भी यूपीएससी के सिलेबस से इस्लामिक स्टडीज को हटाने की मांग रखी है।
कहां से आया यूपीएससी जिहाद का विवाद ?
25 अगस्त को सुदर्शन टीवी चैनल पर एक प्रोमो में एंकर सुरेश चव्हाणके ने यूपीएससी के जरिए नौकरशाही में मुस्लिमों के प्रवेश पर सवाल उठाए थे। सवाल था कि कैसे इस समुदाय के लोग बड़ी संख्या में सिविल सर्विजेस परीक्षा को पास कर रहे हैं ? उन्होंने जामिया के रेसिडेंसियल कांचिंग एकेडमी को जिहादी बताया था और UPSCJihad हैशटैग चलाया था। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुदर्शन टीवी के उस टीवी शो पर रोक लगा दी, जिसमें यह विवादित कार्यक्रम प्रसारित होना था। लेकिन, सोशल मीडिया पर इस्लामिक स्टडीज को सिलेबस से हटाए जाने की मांग जारी है।
यूपीएससी के सिलेबस से इस्लामिक स्टडीज हटाए जाने की मांग कितनी जायज है ? क्या मुस्लिम छात्रों के यूपीएससी में सफल होने की वजह यही एक विषय है ? इन सवालों के जवाब के लिए दैनिक भास्कर की फैक्ट चेक टीम ने पड़़ताल शुरू की।
इस्लामिक स्टडीज को हटाने की मांग करते इस तरह के मैसेज सोशल मीडिया पर आसानी से दिख जाएंगे
## ## ##फैक्ट चेक पड़ताल
- दावा किया जा रहा है कि इस्लामिक स्टडीज विषय के चलते ही परीक्षा में सफल होने वाले मुस्लिम छात्रों की संख्या बढ़ी है। इस दावे की सत्यता जांचने के लिए हमने यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा का सिलेबस चेक किया।
-
साल 2019 की जिस परीक्षा के परिणाम 4 अगस्त को जारी हुए हैं। उसके नोटिफिकेशन में दिए गए सिलेबस में इस्लामिक स्टडीज नाम का कोई विषय नहीं है।
- साल 2020 की सिविल सर्विसेज परीक्षा के नोटिफिकेशन में दिए गए सिलेबस में भी ‘इस्लामिक स्टडीज’ विषय हमें नहीं मिला।
- पड़ताल के दौरान हमें आईएएस अधिकारी सोमेश उपाध्याय का एक ट्वीट मिला। सोमेश ने अपने ट्वीट में इस्लामिक स्टडीज वाले दावे को तंज कसते हुए फेक बताया है। ट्वीट का हिंदी अनुवाद है - एक समानांतर दुनिया है, जहां यूपीएससी के ऑप्शनल सब्जेक्ट में इस्लामिक स्टडीज भी है। इसे वॉट्सएप यूनिवर्स कहा जाता है।
एक्सपर्ट की राय
‘सिविल सर्विसेज क्लब’ के संस्थापक लक्ष्मी शरण मिश्रा लंबे समय से स्टूडेंट्स को यूपीएससी परीक्षा के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। वे कहते हैं : UPSC में इस्लामिक स्टडीज नाम का कोई सब्जेक्ट नहीं है। उर्दू साहित्य के सिलेबस में भी इस नाम की कोई यूनिट नहीं है। यहां तक की हिस्ट्री के सिलेबस में भी अब मुस्लिम काल से जुड़े सवाल नहीं पूछे जाते। मेरा अनुभव रहा है कि ज्यादातर मुस्लिम स्टूडेंट्स भी उर्दू की जगह दूसरे सब्जेक्ट लेकर ही सिविल सर्विसेज परीक्षा में सिलेक्ट हो रहे हैं। 2019 में जो 829 लोग सफल हुए उनमें मुस्लिम कैंडिडेट्स की संख्या केवल 42 है, यानी केवल 5 %। जबकि देश की आबादी में मुसलमानों का हिस्सा 14 % है। तो चिंता इस बात की होनी चाहिए कि इन सेवाओं में मुसलमानों की भागीदारी उनकी जनसंख्या के अनुपात में कम क्यों है।
एक नजर में यूपीएससी का सिलेबस
यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा में दो चरण होते हैं। प्रिलिम्स और मेन्स। प्रिलिम्स के सिलेबस में जनरल अवेयरनेस, हिस्ट्री, इंडियन पॉलिटी, ज्योग्राफी, इकोनॉमिक एंड सोशल डेवलपमेंट,क्लाइमेट चेंज, लॉजिकल रीजनिंग, रीडिंग कॉम्प्रिहेन्शन आदि विषय शामिल हैं।
मेन्स का सिलेबस कुल सात हिस्सों में बंटा है। इसमें पांच विषय सभी के लिए अनिवार्य होते हैं। वहीं छठवां और सातवां विषय चुनने की छूट कैंडिडेट के पास होती है। यूपीएससी द्वारा जारी की गई ऑप्शनल सब्जेक्ट्स की लिस्ट में से कोई विषय ही कैंडिडेट अपने छठवें और सातवें विषय के रूप में चुन सकता है। इन ऑप्शनल सब्जेक्ट्स की लिस्ट में ‘इस्लामिक स्टडीज’ नहीं है।
निष्कर्ष : सोशल मीडिया पर जिस ‘इस्लामिक स्टडीज’ विषय को यूपीएससी की सिविल सर्विसेज परीक्षा के सिलेबस से हटाने की मांग हो रही है। वह विषय सिलेबस में है ही नहीं।
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जौनपुुर: नहीं मिला मनमाफिक दहेज, कमाने गया दुबई और पत्नी को फोन पर ही बोल दिया तीन तलाक
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औरैया: दबंगों ने घेरकर पीटने के बाद भाजपा कार्यकर्ता को गोली मारी, रेफर
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कोरोना और परीक्षा को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच ऐसे करें स्ट्रेस मैनेजमेंट, देशभर में 1 सितंबर से होगा JEE मेन 2020 का आयोजन
परीक्षा को लेकर जारी विरोध और प्रदर्शन के बीच 1 सितंबर से जेईई मेन की परीक्षाएं शुरू हो रही हैं। ऐसे में बीते दिनों परीक्षा को लेकर हुए विवाद की वजह से स्टूडेंट्स काफी परेशान नजर आ रहे हैं। वहीं कोरोणा के बीच हो रही परीक्षा को लेकर भी स्टूडेंट्स काफी डरे हुए हैं। ऐसे में परीक्षा पहले पढ़ाई पर फोकस करने में काफी मुश्किल हो रही है।
एग्जाम से पहले माइंड को फोकस और कंसंट्रेट करने के लिए रिलैक्सेशन काफी जरूरी है। एग्जाम शुरू होने से पहले कोरोनावायरस और परीक्षा को लेकर हुए एग्जाम के कारण हुए इस स्ट्रेस से बचने के लिए साइकोलॉजिस्ट मोनिका शर्मा से जाने स्ट्रेस मैनेजमेंट की कुछ टिप्सः
सोशल मीडिया पर बर्बाद ना करें समय
कोरोना की वजह से अब जीवन न्यू नॉर्मल के साथ आगे बढ़ रहा है। लोग सावधानी और सतर्कता से अपने काम पर जा रहे हैं। इसी सतर्कता का पालन करते हुए स्टूडेंट्स को भी बिना डरे जेईई और नीट की परीक्षाएं देनी चाहिए। परीक्षा के आखिरी वक्त में अब अपना समय सोशल मीडिया पर एग्जाम को लेकर चल रहे विवाद को देखने में बर्बाद ना करें। एग्जाम होने या ना होने पर स्थित में भी अपनी तैयारी पूरी रखें।
कोरोना से जुड़ी खबरों को देखने से बचें
टीवी पर कोरोना से जुड़ी खबरों को देखने से बचें, क्योंकि ऐसी खबरें आपके स्ट्रेस को और बढ़ा सकती है। परीक्षा के लिए खुद को इस तरह तैयार करें, जैसे आम समय में परीक्षा का आयोजन होता है। यदि परीक्षा स्थगित होती भी है, तब भी यह तैयारी आपको आगे काम ही आएगी और यदि परीक्षा होती भी है तो आप अपने आप को उसके लिए तैयार पाएंगे
मौजूदा हालात में निगेटिविटी से दूर रहे और पॉजिटिविटी के साथ कोरोना से बचने के लिए और लोगों की तरह मास्क और ग्लव्स का इस्तेमाल और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए परीक्षा केंद्र पर जाएं।
कोरोना के बीच परीक्षा के लिए खुद को तैयार करने के लिए अपनाएं यह टिप्सः
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रोजाना 10 से 15 मिनट मेडिटेशन करें।
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दिन में 2 से 3 बार थोड़े वक्त के लिए ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी करें।
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उन चीजों को करें जिससे आपको रिलैक्सेशन मिले, जैसे कि गाने सुनना, शॉवर लेना, खाना पकाना आदि।
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मौजूदा समय में ध्यान रखें कि आप अच्छी और पूरी नींद ले। हालातों का प्रभाव अपनी स्लीप साइकिल पर ना पड़ने दे।
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अपने स्ट्रेस और अकेलेपन से बचने के लिए आप ऑनलाइन या वीडियो कॉल के जरिए ग्रुप स्टडीज भी कर सकते हैं।
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परीक्षा को लेकर जारी असमंजस को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ अपनी तैयारियों पर फोकस करें।
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ऐसे लोगों से दूर रहने की कोशिश करें जो भविष्य की अनिश्चितता और नकारात्मकता के बारे में बातें करते हैं।
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यूपी: पत्नी दो बच्चों के साथ दिल्ली में, बेटे के साथ ससुराल आए पति ने उठाया खौफनाक कदम
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मेरठ में युवक की गोली मारकर हत्या, परिजनों में मचा कोहराम, जांच में जुटी पुलिस
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चंडीगढ़ में मोर्टार बम मिलने से हड़कंप, बम स्क्वायड टीम और पुलिस जांच में जुटी
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पीएम ने सितंबर को "पोषण माह" के रूप में मनाने का किया ऐलान , बोलें- छात्रों की क्षमता प्रदर्शित करने में बड़ी भूमिका निभाता है पोषण, सार्वजनिक भागीदारी से इसे सफल बनाएं
रविवार को रेडियो कार्यक्रम मन की बात के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में बात करते हुए, सितंबर को "पोषण माह" के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि “हमारे बच्चों और छात्रों की क्षमता प्रदर्शित करने में सही पोषण बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं।
“पोषण महीने के दौरान, MyGov पोर्टल पर भोजन और पोषण क्विज आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा इस दौरान एक मीम प्रतियोगिता भी होगी। इसमें खुद भाग लेने के साथ ही दूसरों को हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है।
न्यूट्रिशन मॉनिटर की हो शुरुआत
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक कहावत है- यथा अन्नम तथा मन्नम है, यानी कि हमारा मानसिक और बौद्धिक विकास सीधे हमारे भोजन सेवन की गुणवत्ता से जुड़ा होता है। ऐसे में पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। स्कूलों में जागरूकता बढ़ाने के लिए क्लास मॉनिटर की तरह न्यूट्रिशन मॉनिटर की भी शुरुआत की जानी चाहिए। उन्होंने गर्भवती महिलाओं के लिए पौष्टिक आहार के महत्व के बारे में भी बात की।
जन आंदोलन में परिवर्तित हो भागीदारी
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि विशेषज्ञों के मुताबिक गर्भ में और बचपन के दौरान बच्चे के लिए बेहतर पोषण से उनका मानसिक विकास बेहतर होगा और वे स्वस्थ रहेंगे। बच्चों के लिए पोषण सुनिश्चित करने के लिए, माँ को भी पूर्ण पोषण मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषण के इस आंदोलन में लोगों की भागीदारी भी बहुत महत्वपूर्ण है। यह सार्वजनिक भागीदारी है जो इसे सफल बनाती है। हमारे देश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान इस दिशा में काफी प्रयास किए गए हैं। विशेष रूप से हमारे गांवों में, इसे सार्वजनिक भागीदारी के साथ एक जन आंदोलन में परिवर्तित किया जा रहा है।
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श्रीनगर में मोहर्रम पर निकाला जुलूस, पथराव में 20 लोग घायल
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देश के पिछले गौरव को दोबारा हासिल करने में मदद करेगी नई शिक्षा नीतिः केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने नई शिक्षा नीति के बारे में कहा कि यह नीति भारत को शिक्षा के केंद्र के रूप में अपने पिछले गौरव को दोबारा हासिल करने में मदद करेगी। ओडिशा के केंद्रीय विश्वविद्यालय के 12 वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में निशंक ने यह बात कही। इस दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और ओडिशा के राज्यपाल गणेशी लाल सहित अन्य प्रतिष्ठित व्यक्ति भी मौजूद रहे हैं।
राष्ट्रपति ने मूल्य आधारित शिक्षा दिया जोर
अपने संबोधन में, निशंक ने कहा कि एक युग था जब भारत विदेशों को "अकादमिक कौशल" के लिए "आकर्षित" किया गया था।" अब, नई शिक्षा नीति के जरिए वही शिक्षा वापस हासिल करने का समय है। वहीं राष्ट्रपति कोविंद इस दौरान ने छात्रों और युवाओं के विकास और विकास के लिए मूल्य आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
राज्यपाल गणेशी लाल भी रहे मौजूद
कार्यक्रम में राज्यपाल गणेशी लाल ने आशा व्यक्त की, कि राष्ट्र नई शिक्षा नीति के तहत पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करेंगे। साथ ही केंद्रीय पेट्रोलियम और इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ज्यादा से ज्यादा ऊंचाइयों को प्राप्त करने के लिए अधिक सहयोगी प्रयासों के महत्व पर जोर दिया।
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IIT भुवनेश्वर ने ऑनलाइन शुरू किया नया एकेडमिक ईयर, कोरोना के कारण तीन हफ्ते देरी से शुरू हुआ सेशन
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT), भुवनेश्वर ने कोविद -19 महामारी के बीच अपने ऑन-रोल स्टूडेंट्स के साथ ही न्यू स्टूडेंट्स (एमटेक, एमएससी और पीएचडी) के लिए नए एकेडमिक ईयर के लिए क्लासेस शुरू कर दी है। संस्थान ने एक बयान में कहा कि कैंपस में फेस-टू -फेस लगने की बजाय अब सभी क्लासेस लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए आयोजित की जा रही है।
तीन सप्ताह की देरी शुरू हुआ सत्र
सामान्य स्थिति की तुलना में इस बार सिर्फ तीन सप्ताह की देरी के साथ, मौजूदा सेमेस्टर समय पर शुरू हो गया है। बाद में स्थिति में सुधार होने पर स्टूडेंट्स को परमिट के रूप में एक एसओपी के साथ परिसर में लाया जाएगा। इस बारे में निदेशक प्रो आर वी राजाकुमार ने कहा, " अब सिर्फ बी.टेक स्टूडेंट्स के 2020-21 बैच के की क्लासेस शुरू करना बाकी है।" यह देखते हुए कि जेईई मेन्स और जेईई (एडवांस्ड) की परीक्षाएं सितंबर में होने वाली हैं, उन्होंने कहा कि संस्थान स्टूडेंट्स को एडमिशन देगा और कुछ महीनों के बाद अपनी क्लासेस शुरू कर देगा।
कोरोना के कारण ऑनलाइन होगी क्लासेस
वहीं,ऑनलाइन मोड के जरिए पढ़ाई के बारे में प्रो कुमार ने कहा, “महामारी की वजह से इंस्टीट्यूट ने ऑनलाइन मोड के जरिए नए एकेडमिक ईयर को शुरू करने का फैसला किया है। इसमें कुछ कमियां और कुछ फायदे भी हैं। हमारा प्रयास नुकसान को कम करने और फायदे को बढ़ाने में होना चाहिए। सीखना शिक्षा का एक महत्वपूर्ण घटक है और इसलिए एक छात्र की भूमिका, एक मेन स्टेकहोल्डर के रूप में सफलता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, निदेशक ने कहा।
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श्रीनगरः शौचालय बनाए बगैर एनजीओ के खाते में मिलीभगत से डाले गए 38 लाख रुपये
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संस्कृत के पुराने ग्रंथों से वैज्ञानिक ज्ञान सिखाया IIT इंदौर , 2 अक्टूबर तक चलने वाले कोर्स के लिए दुनियाभर से 750 लोगों ने कराया रजिस्ट्रेशन
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT), इंदौर ने संस्कृत के भारत के पुरातन वैज्ञानिक ग्रंथों को मूल भाषा में पढ़ने और मूल रूप में समझने के लिए एक विशेष कोर्स शुरू किया है। प्राचीन ज्ञान को फिर से उजागर करने के मकसद से इस कोर्स की शुरुआत की जा रही है। इस बात की एक अधिकारी ने जानकारी दी। संस्कृत भारती मध्य क्षेत्रम सहित आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी इंदौर के विषय विशेषज्ञ इस कोर्स के तहत लोगों को भारत के पुरातन साहित्य का ज्ञान संस्कृत में दे रहे हैं। यह कोर्स अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा प्रायोजित है, जो 22 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलेगा।
62 घंटे होंगी ऑनलाइन क्लासेस
इस कोर्स में 62 घंटे ऑनलाइन क्लासेस होंगी, जिसके लिए दुनियाभर से करीब 750 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया है। आईआईटी इंदौर के कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर नीलेश कुमार ने बताया कि भारत के प्राचीन ग्रंथों में गणितीय और वैज्ञानिक ज्ञान की समृद्ध विरासत है, जिससे वर्तमान पीढ़ी अनजान है। इस पाठ्यक्रम में प्रतिभागियों को अनुसंधान, नवाचार, अध्ययन और संस्कृत में गणित और विज्ञान पढ़ाया जा रहा है। कोर्स को दो भागों में बांटा गया है।
दो भागों में होगी पढ़ाई
पहले हिस्से में प्रतिभागियों को भाषा की समझ बनाने के लिए संस्कृत की बारीकियां सिखाई जाएंगी। वहीं, दूसरे हिस्से में उन्हें संस्कृत में शास्त्रीय गणित पढ़ाया जाएगा। पाठ्यक्रम के दूसरे भाग में शामिल प्रतिभागियों का मूल्यांकन करने के लिए एक पात्रता परीक्षा भी आयोजित की जाएगी। इसमें सफल होने वाले स्टूडेंट्स को एक सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। दूसरे भाग में आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर के. रामसुब्रमण्यम और आईआईटी बॉम्बे के ही डाॅ. के. महेश इसके बारे में चर्चा कर रहे हैं। संस्कार भारती के प्रमोद पंडित, मयूरी फड़के और प्रवेश वैष्णव कोर्स के पहले भाग के इंस्ट्रक्टर हैं।
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Saturday, 29 August 2020
गोरखपुर: बागीचे में पेड़ से लटका मिला युवक का शव, जांच में जुटी पुलिस
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अलीगढ़ः फावड़ा मार कर किशोरी की हत्या
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ठगी का शिकार होने से बचे छह एथलीट
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शर्मनाक! कानपुर देहात में साठ साल की वृद्धा से दुष्कर्म कर धमकाया
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रिश्वतखोरी में फंसे गभाना के दो दरोगाओं पर मुकदमे दर्ज
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गोरखपुर: बुजुर्ग महिला से दुष्कर्म की हुई पुष्टि, आरोपा पर बढ़ाई गई धारा
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यूपी: भूमि विवाद में किसान की चाकुओं से गोदकर हत्या, हत्यारोपी पिता-पुत्र गिरफ्तार
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NTA ने दिल्ली यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम के लिए जारी किया एडमिट कार्ड, 6 सितंबर से आयोजित होगी परीक्षा
दिल्ली यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम (DUET) 2020 में शामिल होने वाले स्टूडेंट्स के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं। जिन उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया है, वे ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in के जरिए एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।
6 सितंबर से शुरू होगी परीक्षा
NTA ने DUET से जुड़े किसी भी प्रश्न के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। उम्मीदवार परीक्षा से जुड़ी किसी प्रकार की जानकारी के लिए 8287471852, 8178359845, 9650173668, 9599676953 और 8882356803 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अवाला duet@nta.ac.in पर मेल भी कर सकते हैं। 6 सितंबर से 11 सितंबर के बीच आयोजित होने वाली यह परीक्षा कंप्यूटर आधारित होगी। परीक्षा का आयोजन यूजी, पीजी और एमफिल / पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए किया जाता है।
ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
- सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट nta.ac.in पर लॉगइन करें।
- अब होमपेज पर DUET एडमिट कार्ड 2020 लिंक पर क्लिक करें।
- नया पेज खुलने पर फॉर्म नंबर और जन्म तिथि दर्ज कर लॉगइन करें।
- अब आपका प्रवेश पत्र स्क्रीन पर डिस्प्ले हो जाएगा।
- इसे डाउनलोड कर और प्रिंट निकाल कर संभाल कर रख लें।

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बहू ने फेसबुक पर वायरल कर दिया ससुर का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र, केस दर्ज
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प्रेमी को प्रेमिका से पाना था छुटकारा, जंगल में ले जाकर की हत्या की कोशिश, और फिर
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वाराणसी में दिनदहाड़े दो लोगों की गोली मारकर हत्या के दौरान का दृश्य, तस्वीरों में देखें डरावने वाला मंजर
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वाराणसी: आरटीओ से बचने की फिराक में ट्रक छोड़कर भाग रहा ड्राइवर, दूसरे वाहन की चपेट में आने से मौत
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झारखंड सरकार ने किया सार्वजनिक परिवहन और होटल खोलने का फैसला, ओडिशा में स्टूडेंट्स को मिलेगा मुफ्त परिवहन और आवास
अगले महीने एक सितंबर से होने वाली JEE-NEET परीक्षाओं के मद्देनजर झारखंड सरकार ने 30 सितंबर तक एक महीने के लिए राज्य में सार्वजनिक परिवहन, होटल, लॉज और रेस्तरां को दोबारा खोलने की अनुमति दी है। इस संबंध में राज्य में शुक्रवार देर रात "अनलॉक 4" के तहत की गई छूट के बारे में अधिसूचना जारी की। मुख्य सचिव सुखदेव सिंह द्वारा आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत जारी निर्देश के मुताबिक, अब लॉकडाउन को 30 सितंबर तक बढ़ा दिया गया है।
स्टूडेंट्स को होगी बाहर जाने की अनुमति
हालांकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि नियंत्रण क्षेत्र में रहने वाले कैंडिडेट्स को परीक्षा में बैठने के लिए बाहर जाने की अनुमति होगी। “उनके एडमिट कार्ड को मूवमेंट परमिट की तरह समझा जाएगा। जिसके बाद अब स्टूडेंट्स को स्थानीय अधिकारियों से अलग से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। जेईई-नीट के दौरान, अन्य राज्यों से आने और जाने वाले कैंडिडेट्स को 14 दिन के क्वारैंटाइन से छूट दी जाएगी।
परीक्षा वाले शहरों में नहीं होगा लॉकडाउन
वहीं, ओडिशा ने भी शुक्रवार को 30 अगस्त से 7 सितंबर तक और 12 सितंबर से 14 सितंबर तक नीट और जेईई परीक्षा के आयोजन के चलते परीक्षा वाले शहरों में लॉकडाउन नहीं लगाने का फैसला किया है। इस बारे में आदेश जारी करते हुए कहा गया है कि महामारी को देखते हुए सभी कोरोना सुरक्षा के मानदंडों का परीक्षा केंद्रों पर पालन किया जाएगा।
नि: शुल्क होगा परिवहन और आवास
“आयोजक यह सुनिश्चित करेंगे कि कोविड -19 से संबंधित सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल जैसे कि सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क-पहनना, सार्वजनिक स्थान पर थूकना, व्यक्तिगत स्वच्छता आदि को केंद्र के अंदर विधिवत बनाए रखा जाए। साथ ही ओडिशा के मुख्य सचिव असित त्रिपाठी ने बताया कि राज्य सरकार ने राज्य में जेईई और नीट के लिए नि: शुल्क परिवहन और आवास की सुविधा प्रदान करने का भी फैसला लिया है।
एक सितंबर से शुरू होगी परीक्षाएं
इससे पहले, राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री को पत्र लिखकर NEET और JEE परीक्षाओं को स्थगित करने के लिए मांग की थी। लेकिन, अब सुप्रीम कोर्ट और सरकार के फैसले के बाद राज्य परीक्षा में तैयोरियों में जुटी हुआ है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने सितंबर 1-6 के बीच जेईई मेन और 13 सितंबर को NEET आयोजित करने का फैलसा लिया है।
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यूपी: मासूम बेटी को गोद में लेकर ट्रेन के आगे कूदा, मासूम की कटकर मौत, पिता की बची जान
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने की परीक्षा स्थगित करने की मांग, 6 गैर- एनडीए राज्य पहले ही दायर कर चुके हैं रिव्यू पिटीशन
जेईई-नीट के आयोजन को लेकर एनटीए और सरकार के तरफ से परीक्षा के आयोजन के बारे में जानकारी में दिए जान के बाद भी परीक्षा को लेकर लगातार विरोध जारी है। इसी क्रम में अब राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने केंद्र सरकार से कोरोना महामारी के बीच जेईई और नीट परीक्षा को स्थगित करने की मांग की है।
अशोक गहलोत ने शेयर किया वीडियो संदेश
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा कि लाखों स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। देश में कोरोना वायरस बढ़ते मामलों और महामारी के कारण परिवहन और होटलों की समस्या को देखते हुए केंद्र को तुरंत फैसला लेना चाहिए, क्योंकि अब बहुत कम समय बचा है। सरकार को परीक्षा स्थगित करने में अब संकोच नहीं करना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने तीन से छह महीने परीक्षा स्थगन की मांग की
वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस से राज्य सभा सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा कि कोरोना के कारण बनी मौजूदा स्थिति को देखते हुए परीक्षाएं तीन से छह महीने के लिए स्थगित कर दी जानी चाहिए। देश में रोजाना कोरोनावायरस के 70,000 से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन इस स्थिति के बीच, NEET- JEE परीक्षा आयोजित की जा रही है। ऐसे में अगर छात्रों को कुछ हुआ तो इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा? राज्यसभा सांसद ने यह भी कहा कि , "मैं केंद्र और सुप्रीम कोर्ट से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करता हूं ,क्योंकि हमें भी बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना है।"
6 राज्यों ने दायर की रिव्यू पिटीशन
इससे पहले शुक्रवार को 6 राज्यों के मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपने आदेश की समीक्षा करने की मांग करते हुए रिव्यू पिटीशन दायर की है। दरअसल, 17 अगस्त को शीर्ष अदालत ने मेडिकल और इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम NEET और JEE को स्थगित करने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। जिसके बाद अब यह तय शेड्यूल यानी 1 से 6 सितंबर के बीच जेईई और 13 सितंबर को नीट का आयोजन किया जाएगा।
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पत्रकार हत्याकांड: सभी आरोपी गिरफ्तार, हत्यारोपियों के खिलाफ लगेगा एनएसए और होगी गैंगस्टर की कार्रवाई
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Friday, 28 August 2020
वाराणसी दिनदहाड़े हत्याकांड: 9 एमएम की पिस्टल का शौक, आठ साल से बेच रहा था मुंगेर में बने असलहे
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भारत में 24 फीसदी स्टूडेंट्स के पास ऑनलाइन एजुकेशन के लिए इंटरनेट कनेक्शन उपलब्ध, शहरी- ग्रामीण और लिंग विभाजन में भी काफी बड़ा अंतर
हाल ही में जारी यूनिसेफ की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में ऑनलाइन एजुकेशन के लिए सिर्फ 24 फीसदी स्टूडेंट्स के पास इंटरनेट कनेक्शन उप्लब्ध हैं। इसके अलावा शहरी- ग्रामीण और लिंग विभाजन में भी काफी बड़ा अंतर है, जिससे उच्च, मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों में पढ़ाई के स्तर पर भी काफी अंतर पड़ सकता है।
स्मार्ट लर्निंग से दूर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे
गुरुवार को रिमोट लर्निंग रिचेबिलिटी रिपोर्ट जारी करते हुए यूनिसेफ ने डिस्टेंस लर्निंग की पहुंच से जूझ रहे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए चिंता जाहिर की। रिपोर्ट में यूनिसेफ ने कहा कि उपलब्ध आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में सिर्फ एक चौथाई घरों (24 फीसदी) में इंटरनेट की पहुंच है। साथ ही एक बड़ा ग्रामीण- शहरी और लैंगिक विभाजन भी है, जिसके के कारण उच्च, मध्यम और निम्न आय वाले परिवारों में सीखने का अंतर भी काफी बड़ा है। ऐसा इसलिए क्योंकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की स्मार्ट लर्निंग तक पहुंच नहीं हैं।
लड़कियों की स्मार्टफोन तक पहुंच कम
रिपोर्ट में आगे कहा गया कि ज्यादातर हाशिए समुदायों के बच्चे विशेषकर लड़कियों के पास स्मार्टफोन की पहुंच आसान नहीं और यदि किसी के पास फोन उपलब्ध भी है, तो इंटरनेट कनेक्टिविटी खराब है या गुणवत्ता वाली शिक्षा सामग्री आसान भाषा में उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कोरोना की वजह से देश में करीब 15 लाख से ज्यादा स्कूल बंद है। ऐसे में प्री- प्राइमरी से लेकर सेकेंडरी तक के करीब 28.6 करोड बच्चों की शिक्षा काफी प्रभावित हुई है। इन बच्चों में 49 फीसदी लड़कियां शामिल है, जबकि 6 करोड़ लड़के- लड़कियां कोरोनावायरस से पहले ही स्कूल से बाहर थे।
कोरोना काल में घर पर ही जारी पढ़ाई
वहीं कोरोना को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों ने घर पर ही पढ़ाई जारी रखने के लिए डिजिटल और गैर- डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कई पहल शुरू की है। ऐसे में अब यूनिसेफ ने भी बच्चों की सीखने की सामग्री के उपयोग और उसमें सुधार के लिए कई कदम उठाने और रणनीति बनाने का फैसला किया है। इस बारे में यूनिसेफ इंडिया के प्रतिनिधि यास्मीन अली हक ने समुदायों, माता- पिता और स्वयंसेवकों के साथ बच्चों तक पहुंचने और मौजूदा दौर में उनकी पढ़ाई में मदद के लिए संयुक्त दृष्टिकोण अपनाने को कहा है। यास्मीन ने कहा कि मौजूदा दौर में सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। स्कूल बंद है, माता- पिता के पास रोजगार नहीं है और परिवार तनाव से गुजर रहा है। ऐसे में बच्चों की एक पूरी पीढ़ी ने उनकी पढ़ाई को बाधित होते देखा है।
ऑनलाइन एजुकेशन से दूर दुनिया के 46.3 करोड़ बच्चे
यही नहीं, डिजिटल शिक्षा तक पहुंच भी सीमित होने की वजह से सीखने के इस अंतर को कम नहीं किया जा सकता। ऐसे में बच्चों तक पहुंचने के लिए सभी को एक मिश्रित दृष्टिकोण अपनाना होगा। कोरोना की वजह से दुनिया भर में बंद स्कूल के करीब एक तिहाई स्कूली बच्चे यानी 46.3 करोड़ बच्चे ऑनलाइन एजुकेशन हासिल करने में असमर्थ है। ऐसे में यूनिसेफ ने सरकारों से आग्रह किया है जब वह लॉकडाउन ढील देना शुरू करेंगे, तब वे स्कूलों को सुरक्षित ढंग से दोबारा खोलने को प्राथमिकता दें।
100 देशों के बच्चों पर आधारित है रिपोर्ट
यूनिसेफ की यह रिपोर्ट 100 देशों के प्री- प्राइमरी, प्राइमरी, लोयर- सेकेंडरी और अपर सेकेंडरी में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों के पास रिमोट लर्निंग के लिए उपलब्ध सामग्री के आधार पर तैयार की गई है। इसके अलावा बच्चों की टीवी, रेडियो, इंटरनेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाले स्टडी मैटेरियल की उपलब्धता को भी शामिल किया गया है।
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यूपी: खेत में सो रहे बुजुर्ग की धारदार हथियार से हत्या, पत्नी का भी गला दबाने की कोशिश
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CS पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का खर्च उठाएगा ICSI, होनहार और आर्थिक रूप से कमजोर स्टूडेंट्स की मदद करने का किया ऐलान
इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया (ICSI) ने होनहार और आर्थिक रूप से कमजोर स्टूडेंट्स की मदद के लिए बड़ा फैसला किया है। इंस्टीट्यूट ने 'स्टूडेंट्स एजुकेशन फंड ट्रस्ट' के जरिए ऐसे स्टूडेंट्स की पढ़ाई का खर्च देने का फैसला किया है, जो न सिर्फ पढ़ाई में होशियार है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। इसके लिए इंस्टीट्यूट ने एक क्राइटेरिया भी तय किया है, जिसके जरिए योग्य स्टूडेंट इसके लिए अप्लाय कर सकते हैं।
कौन कर सकते हैं आवेदन
इसका मकसद मुख्य रूप पर जरूतरमंद बच्चों की मदद करना है, ऐसे में जिन स्टूडेंट्स के परिवार की सालाना कमाई 3 लाख रुपये से कम है, वे इसके लिए अप्लाय कर सकते हैं। परिवार की इनकम 3 लाख से नीचे होने के साथ ही स्टूडेंट के 12वीं क्लास में 65% मार्क्स या ग्रेजुएशन में 60% नंबर हासिल हों। इसके अलावा ऐसे में स्टूडेंट, जिन्होंने 12वीं क्लास में 85 फीसदी नंबर पाए हों या ग्रेजुएशन में 70 फीसदी स्कोर किया हो, वे भी इसके लिए आवेदन कर अपनी पढ़ाई का खर्च पा सकते हैं।
रजिस्ट्रेशन फीस होगी रिफंड
एक ऑफिशियल बयान में इंस्टीट्यूट बताया कि, ''इस स्कीम की गाइडलाइन्स के तहत योग्य छात्रों को कंपनी सेक्रेटरी एग्जीक्यूटिव एंट्रेंस टेस्ट (CSEET) के लिए जमा की गई पूरी रजिस्ट्रेशन फीस वापस की जाएगी। ये फीस एग्जाम पास करने के बाद ही रिफंड की जाएगी।'' वहीं, अगर स्टूडेंट इस एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम में एडमिशन लेते हैं, तो बाद में उनकी जमा की गई अन्य फीस भी वापस की जाएंगी। पहले अटेम्प्ट में ही पास करने पर एग्जामिनेशन फीस भी रिफंड कर दी जाएगी।
29 अगस्त को होगी परीक्षा
ICSI ने इस स्कीम की शुरुआत ऐसे बच्चों को मोटिवेट करने के लिए की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर है या पढ़ाई में बहुत अच्छे हों और CS का कोर्स करने के इच्छुक हों। आवेदन करने के लिए फॉर्म इंस्टीट्यूट की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। इस बार कोरोना की वजह से CSEET का आयोजन रिमोट प्रॉक्टर्ड टेस्ट के आधार पर 29 अगस्त को किया जाएगा। इसके तहत कैंडिडेट्स को किसी सेंटर जाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वे अपने घरों से ही ऑनलाइन इस एग्जाम को दे पाएंगे।
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यूपी: सरकारी जमीन पर कब्जा करने को लेकर मारपीट, गोली लगने से किशोर घायल
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फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षा दिए बिना डिग्री नहीं मिलेगी; आसान Q&As से समझिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कॉलेज की फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने यूजीसी की 6 जुलाई को जारी गाइडलाइन को कायम रखा है। यानी राज्यों को 30 सितंबर से पहले फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षाएं करानी ही होंगी। राज्य सरकार परीक्षा टाल सकती है, लेकिन अंतिम फैसला यूजीसी का ही होगा। यह भी तय हो गया है कि स्टूडेंट्स परीक्षा पास किए बिना हायर क्लासेस में प्रमोट नहीं होंगे। इस फैसले के बाद भी स्टूडेंट्स के कई भ्रम बरकरार है, जिन्हें दूर करने के लिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बनी स्थिति को इन Q&As के जरिए सामने रख रहे हैं...
सबसे पहले, यह पूरा विवाद क्या है?
- कोरोनावायरस महामारी से बचाव के लिए देशभर में मार्च में लॉकडाउन लगा था। तब से स्कूल-कॉलेज बंद हैं। कई कॉलेजों में परीक्षाएं नहीं हो सकी हैं। फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षाएं भी नहीं हुई हैं।
- कुछ राज्य और स्टूडेंट्स चाहते थे कि कोरोना के डर की वजह से परीक्षाओं को रद्द कर दिया जाए। इंटरनल असेसमेंट या पिछले वर्षों के परफॉर्मंस के आधार पर प्रमोशन दे दिया जाए। यूजीसी भी राजी हो गई।
- लेकिन फिर पेंच फंस गया फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर। यूजीसी के कानून के तहत बिना परीक्षा लिए डिग्री नहीं दी जा सकती। तब, यूजीसी ने 6 जुलाई को गाइडलाइन जारी की। राज्यों और यूनिवर्सिटीज से कहा कि 30 सितंबर से पहले फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षा करवा लें।
- महाराष्ट्र में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत कॉलेजों में सभी परीक्षाएं रद्द कर दी गई थी। यूजीसी की गाइडलाइन आई तो टकराव की स्थिति बन गई। वहीं, कुछ स्टूडेंट्स भी राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कोर्ट में पहुंच गए।
स्टूडेंट्स/टीचर एसोसिएशन का क्या कहना था?
- कोरोना महामारी को देखते हुए स्टूडेंट्स की परीक्षा लेना उनकी जान को जोखिम में डालेगा। उनके जीने के अधिकार पर इसका असर पड़ेगा। यूजीसी ने अपनी गाइडलाइन में स्थानीय परिस्थितियों पर ध्यान नहीं दिया है।
- महामारी और लॉकडाउन की वजह से क्लासेस नहीं हो सकी है। ऐसे में आवश्यक संख्या में क्लासेस नहीं होने के बावजूद परीक्षाएं लेना मनमाना और अतार्किक फैसला है।
- फाइनल ईयर/सेमेस्टर के कई स्टूडेंट्स ने जॉब इंटरव्यू क्लीयर कर लिए हैं या हायर कोर्सेस में एडमिशन ले लिया है। ऐसे में उन्हें जल्द से जल्द डिग्री सर्टिफिकेट दे दिए जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
यूजीसी और राज्य सरकार का क्या तर्क था?
- दरअसल, इस पूरे मुद्दे में दो कानून आमने-सामने थे। यूजीसी का कानून और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट। महाराष्ट्र ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत ही परीक्षाएं रद्द कर स्टूडेंट्स को प्रमोट करने का फैसला किया था।
- यूजीसी का कहना है कि देश में जब भी हायर एजुकेशन की बात आएगी तो उसका कहा शब्द ही अंतिम होगा। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी उसके अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं दे सकती।
इन दलीलों को सुनकर क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी को परीक्षाओं को स्थगित करने का अधिकार है, लेकिन परीक्षाओं को रद्द कर स्टूडेंट्स को प्रमोट करने का अधिकार नहीं है।
- राज्य और केंद्रशासित प्रदेश 30 सितंबर की डेडलाइन को बढ़ाने पर यूजीसी से बात कर सकते हैं। लेकिन अंतिम फैसला यूजीसी का ही होगा कि डेडलाइन बढ़ाने की अनुमति दी जाए या नहीं।
... तो क्या महाराष्ट्र में परीक्षाएं नहीं होंगी?
- जरूर होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में जारी यूजीसी की गाइडलाइन को कायम रखा है। यह भी कहा कि बिना परीक्षा के किसी को भी डिग्री नहीं दी जा सकेगी। उसे प्रमोट नहीं किया जा सकेगा।
- यदि किसी राज्य सरकार ने इस फैसले के बाद भी 30 सितंबर से पहले परीक्षाएं नहीं कराई तो यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होगी। यूजीसी स्टूडेंट्स की डिग्री जारी नहीं करेगी, इस वजह से यह उनके लिए भी अच्छा नहीं है।
- देश की 818 में से 620 यूनिवर्सिटियों ने अपनी फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षाएं पूरी कर ली हैं या पूरी करने ही वाली थी, जब लॉकडाउन लगा। ऐसे में लगता नहीं कि 30 सितंबर की डेडलाइन में यूजीसी नरमी देने वाली है।
क्या घर से परीक्षा दी जा सकती हैं?
- बिल्कुल दी जा सकती हैं। यूजीसी ने यूनिवर्सिटियों को ऑफलाइन, ऑनलाइन या ब्लेंडेड मोड में परीक्षाएं कराने की अनुमति दी है। इसका मतलब यह है कि एग्जाम सेंटर जाने की जरूरत नहीं है।
- ऑनलाइन प्रोक्टरिंग के आधार पर होम-बेस्ड एग्जाम भी ली जा सकती है। दिल्ली यूनिवर्सिटी तो ओपन-बुक एग्जाम ले रही है, जिससे स्टूडेंट्स को फ्लेक्जिबिलिटी मिल गई है।
- एग्जाम कैसे ली जाए, यह फैसला यूनिवर्सिटी का रहेगा। भले ही स्टूडेंट्स ऑनलाइन परीक्षा चाहे, यदि यूनिवर्सिटी ऑफलाइन या सेंटर पर परीक्षा चाहेगी, तो वैसे ही देनी होगी।
यदि विदेश में एडमिशन हो गया है तो क्या होगा?
- बिल्कुल। अच्छी बात है कि पुराने परफॉर्मंस के आधार पर एडमिशन मिल गया है, लेकिन उस संस्थान को बताना ही बेहतर होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है।
- फाइनल ईयर की परीक्षा का रिजल्ट आने तक एडमिशन को होल्ड रखा जाएं। सूचना छिपाने की कोशिश न करें क्योंकि देर-सबेर देशी संस्थान हो या विदेशी, स्टूडेंट्स से डिग्री सर्टिफिकेट जरूर मांगेगा।
अब क्या होगा? परीक्षाएं कब होंगी?
- यूजीसी ने तो कह दिया है कि 30 सितंबर की डेडलाइन है। यूनिवर्सिटियों को फाइनल ईयर/सेमेस्टर की परीक्षा तब तक खत्म करनी होगी। लेकिन, आपका राज्य समय बढ़ाने की अपील भी कर सकता है। तब यूजीसी का फैसला अंतिम होगा।
फाइनल ईयर/सेमेस्टर परीक्षा पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद क्या परिस्थिति बनेगी, संक्षेप में यह ग्राफिक्स आपको बताएगा। यदि कोई स्टूडेंट भ्रमित हो रहा है, तो उसके साथ इसे शेयर करें...

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सोशल मीडिया पर किया जा रहा CLAT पोस्टपोन होने का दावा पड़ताल में सच निकला, अब 28 सितंबर को होगी परीक्षा
क्या वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि 7 सितंबर को होने जा रहा कॉमन लॉ एंड एडमिशन टेस्ट ( CLAT) पोस्टपोन कर दिया गया है। दावे के साथ एक नोटिफिकेशन भी वायरल हो रहा है। दावा है कि ये नोटिफिकेशन CLAT परीक्षा आयोजित कराने वाली संस्था कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज ने जारी किया है।
दरअसल, परीक्षा पोस्टपोन होने के दावे को कई न्यूज वेबसाइट्स पर फेक बताया गया है। जिसके चलते परीक्षा की तैयारी रहे कैंडिडेट्स के बीच एक कन्फ्यूजन फैल गया है। इस कन्फ्यूजन को दूर करने के लिए दैनिक भास्कर की फैक्ट चेक टीम ने पड़ताल शुरू की।
कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) का आयोजन देश भर के NLIU में एडमिशन के लिए होता है। कई प्राइवेट लॉ कॉलेज भी CLAT के स्कोर के आधार पर ही एडमिशन देते हैं।
अगले महीने होने जा रही NEET और JEE परीक्षा को पोस्टपोन करने की लगातार मांग उठ रही है। लेकिन, सरकार और परीक्षा कराने वाली एजेंसी एनटीए की तरफ से स्पष्ट किया जा चुका है कि परीक्षा के पोस्टपोन होने की फिलहाल संभावना नहीं है।
दावे से जुड़े ट्वीट
## ##वायरल हो रहा नोटिफिकेशन
फैक्ट चेक पड़ताल
- इंटरनेट पर हमने CLAT परीक्षा पोस्टपोन होने से जुड़ी खबरें ढूंढनी शुरू कीं। आज तक की वेबसाइट पर CLAT पोस्टपोन होने के दावे को फेक बताया गया है।

- दावे की पुष्टि के लिए हमने कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज की ऑफिशियल वेबसाइट चेक की। वेबसाइट के होम पेज पर ही स्पष्ट लिखा है कि CLAT परीक्षा 28 सितंबर, 2020 को होनी है। जबकि पहले ये परीक्षा 7 सितंबर को होनी थी। जाहिर है कि परीक्षा पोस्टपोन होने का दावा सही है।

- 28 अगस्त को ही कंसोर्टियम ने नोटिफिकेशन जारी कर बताया है कि परीक्षा अब 7 सितंबर को नहीं 28 सितंबर को होगी।

- अब सवाल ये है कि जब सच में CLAT पोस्टपोन हुआ है तो सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावे को फेक क्यों बताया गया ? दरअसल 25 अगस्त को कंसोर्टियम ने खुद एक आधिकारिक बयान जारी कर कहा था कि CLAT परीक्षा पोस्टपोन होने का दावा झूठा है। साथ ही वायरल हो रहे नोटिस को फेक बताया था।

निष्कर्ष : सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा नोटिफिकेशन फेक है। लेकिन, क्लैट परीक्षा पोस्टपोन होने का दावा सही है।
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द कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने फिर स्थगित किया कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट, अब 28 सितंबर को आयेजित होगी परीक्षा
द कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ने शुक्रवार को जानकारी दी कि कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT 2020) को 28 सितंबर, 2020 तक के लिए टाल दिया गया है। इस बारे में कंसोर्टियम की ऑफिशियल वेबसाइट पर इस फैसले के बारे में एक नोटिफिकेशन भी किया है। जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, "7 सितंबर 2020 को होने वाली यूजी और पीजी दोनों उम्मीदवारों के लिए क्लैट 2020 परीक्षा को सोमवार, 28 सितंबर 2020 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।"
कई बार स्थगित हुई 10 मई को होने वाली परीक्षा
इससे पहले 10 मई को होने वाली CLAT 2020 परीक्षा को कोरोना महामारी के कारण कई बार स्थगित किया गया है। 10 मई के बाद इसे 24 मई, फिर 21 जून, इसके बाद 22 अगस्त और फिर 7 सितंबर तक को आयोजित करने का फैसला लिया गया था। लेकिन इसे एक बार फिर स्थगित कर दिया गया है। CLAT एक एप्टीट्यूड बेस्ड एग्जाम है, जिसका मकसद स्टूडेंट के इंटरेस्ट को टेस्ट करना होता है। CLAT में इंग्लिश लैंग्वेज, करंट अफेयर्स, जनरल नॉलेज जिसमें लीगल रिजनिंग, रिजनल रिजनिंग और क्वांटिटेटिव तकनीक सहित 5 खंड शामिल हैं।

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उत्तराखंड: घर के अंदर परिवार के चार लोगों के शव गड़े होने की सूचना से मचा हड़कंप, खुदाई करवाने पहुंची पुलिस
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काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर ने जारी की NATA की दूसरी परीक्षा की तारीख, 12 सितंबर को होने वाली परीक्षा के लिए 4 सितंबर तक करें अप्लाय
काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (CoA) ने नेशनल एप्टीट्यूड टेस्ट इन आर्किटेक्चर (NATA) की दूसरी परीक्षा की तारीख जारी कर दी है। यह परीक्षा 12 सितंबर को आयोजित की जाएगी, जिसके लिए कैंडिडेट्स 4 सितंबर तक ऑफिशियल वेबसाइट nata.in के जरिए आवेदन कर सकते हैं। NATA की पहले परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड पहले ही जारी किए जा चुके हैं। कोरोना महामारी के चलते अब यह परीक्षा 29 अगस्त को ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी।
ऑनलाइन आयोजित होगी परीक्षा
NATA 2020 के दोनों भाग A (ड्राइंग टेस्ट) और B (वैज्ञानिक योग्यता और सामान्य योग्यता परीक्षण) ऑनलाइन मोड में आयोजित किए जाएंगे। इस अलावा परिषद ने कैंडिडेट्स के निवास स्थान पर एक नेटवर्क इश्यू होने पर परीक्षा केंद्रों की भी व्यवस्था की है। उम्मीदवार अपने निवास स्थान या काउंसिल द्वारा आवंटित परीक्षा केंद्र से NATA 2020 की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं, अगर उनके पास नेटवर्क कनेक्टिविटी या तकनीकी / हार्डवेयर संसाधन जैसे पीसी, लैपटॉप, वेब कैमरा आदि नहीं हैं।
मॉक टेस्ट में शामिल हो सकते हैं स्टूडेंट्स
साथ ही उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट पर दी गई लिंक के जरिए मॉक टेस्ट भी दे सकते हैं। इसके अलावा उम्मीदवार और पैरेंट्स को नई अपडेट के लिए ऑफिशियल वेबसाइट nata.in पर विजिट करते रहे। किसी भी तरह की अन्य जानकारी के लिए NATA हेल्पडेस्क helpdesk.nata2020@gmail.com और हेल्पलाइन नंबर 9319275557, 7303487773 पर संपर्क कर सकते हैं।
ऐसे डाउनलोड करें एडमिट कार्ड
- सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट nata.in पर जाएं।
- यहां डाउनलोड एडमिट कार्ड लिंक पर क्लिक करें।
- क्लिक करते ही एक नया पेज खुल जाएगा।
- अब रजिस्ट्रेशन नंबर डालकर लॉग-इन करें।
- एडमिट कार्ड डिस्प्ले होने पर इसे डाउनलोड करें।
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डीसी कार्यालय में महिला कर्मी ने जड़े अधिकारी को थप्पड़, पति ने दफ्तर से बाहर घसीटकर पीटा
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कोर्ट के फैसले के बाद ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा #UGCGuidelines, फैसले को लेकर नाराज दिखें स्टूडेंट्स, बिना परीक्षा डिग्री के फैसले को बताया प्रैंक
कोरोना के बीच कॉलेज की फाइनल ईयर की परीक्षाएं करवाने के खिलाफ दायर अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसला सुना दिया। कोर्ट ने यूजीसी की 6 जुलाई की गाइडलाइंस को सही ठहराते हुए कोर्ट ने कहा कि, स्टूडेंट्स बिना परीक्षा दिए प्रमोट नहीं होंगे। हालांकि, मौजूदा हालात में डेडलाइन को आगे बढ़ाने और नई तारीखों के लिए राज्य यूजीसी से सलाह करके फैसला ले सकते हैं।'
फैसले के बाद से ही सोशल मीडिया पर #UGCGuidelines पहले नंबर पर ट्रेंड कर रहा है। इसके साथ ही #finalyearexam भी ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है। कुछ स्टूडेंट्स नोट्स को लेकर मीम्स शेयर कर रहे हैं, तो कुछ बिना परीक्षा डिग्री मिलने के फैसले को प्रैंक बता रहे है। फैसले को लेकर कई स्टूडेंट्स नाराज नजर आ रहे हैं, तो वहीं कुछ मजाकिया ढंग से अपनी भावनाएं जाहिर कर रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीरः शोपियां में लापता पंच का शव बरामद, मामले की जांच में जुटी पुलिस
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परीक्षा स्थगित करने और 17 अगस्त को आए फैसले पर 6 राज्यों ने कोर्ट में लगाई रिव्यू पिटीशन, कोर्ट पहले ही दे चुका है परीक्षा आयोजित करने का आदेश
इंजीनियरिंग और मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम JEE- NEET के आयोजन को लेकर चल रहे विवाद के बीच पश्चिम बंगाल, झारखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और महाराष्ट्र के मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। दायर याचिका में मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 17 अगस्त के जारी किए गए आदेश की समीक्षा करने की मांग की है। साथ ही सितंबर में होने वाली JEE- NEET को स्थगित करने की भी अपील की है।
सरकार बनाम विपक्ष बना जेईई मेन और नीट मुद्दा
वहीं, जेईई मेन और नीट की परीक्षा ने अब सरकार बनाम विपक्ष का रूप ले चुका है। इस सिलसिले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में बुधवार काे 7 राज्याें के मुख्यमंत्रियाें ने परीक्षा टालने की मांग की। पं. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि सभी राज्य सुप्रीम काेर्ट चलें। इसके बाद फैसला लिया गया कि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। वहीं, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने कोर्ट जाने से पहले राष्ट्रपति से मिलने की बात कही थी।
जेईई मेन और नीट (यूजी) के लिए जारी एडमिट कार्ड
वहीं दूसरी तरफ, एनटीए ने जेईई मेन और नीट (यूजी) 2020 दोनो ही प्रवेश परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं, जिसमें एजेंसी द्वारा परीक्षा के लिए जरूरी निर्देशों के साथ-साथ महामारी के सम्बन्ध में आवश्यक सावधानियों और तैयारियों के लिए एसओपी भी उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही एजैंसी ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट, nta.ac.in पर पहले ही कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए एडवाइजरी जारी की है।
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बदला-बदला होगा इस बार JEE और NEET के एग्जाम सेंटर का नजारा; सोशल डिस्टेंसिंग लागू होगी और हैंडहेल्ड मशीन से होगी तलाशी
देशभर के इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन के लिए ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE)-मेन्स 1 से 6 सितंबर के बीच होगी। वहीं, देशभर के मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए होने वाली नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) 13 सितंबर को होगा। इसे लेकर बवाल मचा है। सरकार और आईआईटी समेत सभी इंजीनियरिंग संस्थान चाहते हैं कि निर्धारित तारीखों पर यह एंट्रेंस एग्जाम हो जाए। नहीं हुए तो जीरो ईयर का खतरा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्टूडेंट्स के साथ-साथ पैरेंट्स ने भी अनुरोध किया है कि NEET और JEE परीक्षाओं को टाल दिया जाए। पहले ही 3 मई को होने वाली NEET 26 जुलाई तक और फिर 13 सितंबर तक टल चुकी है। इसी तरह JEE भी टलते-टलते इस स्थिति में पहुंची है। मेन्स के बाद आईआईटी में एडमिशन के लिए एडवांस भी होना है।
NEET और JEE क्या है?
- NEET को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट कहते हैं। यह देशभर के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन के लिए होने वाला एंट्रेंस टेस्ट है। 542 मेडिकल कॉलेजों की 80,055 सीटों पर एडमिशन होता है। 2012 में NEET ने सीबीएसई की AIPMT और राज्यों के अलग-अलग टेस्ट की जगह सिंगल एंट्रेंस टेस्ट के तौर पर पहचान बनाई थी।
- JEE ज्वॉइंट एंट्रेंस एग्जाम है जो दो स्तर पर होता है। मेन्स के जरिये देशभर के एनआईटी, आईआईआईटी और अन्य सरकारी-निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में प्रवेश दिया जाता है। इसी तरह मेन्स क्लीयर करने वालों को एडवांस में भाग लेने का मौका मिलता है, जिसमें सफल छात्रों को आईआईटी में प्रवेश दिया जाता है।
- JEE मेन्स से 2.50 लाख छात्र क्वालिफाई होंगे, जो 27 सितंबर को JEE एडवांस्ड में भाग ले सकेंगे। इसके लिए JEE मेन्स के रिजल्ट यानी 11 सितंबर से रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू होगी। JEE एडवांस्ड के परिणाम पांच अक्टूबर को घोषित होंगे।
NEET और JEE को लेकर बवाल क्यों मचा है?
- कई स्टूडेंट्स और पैरेंट्स ने केंद्र सरकार से कोविड-19 को देखते हुए दोनों ही परीक्षाओं को रद्द करने की अपील की है। इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ मीटिंग की।
- झारखंड, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री भी इस बैठक में शामिल हुए। सबने एक स्वर में इन परीक्षाओं को टालने की मांग की है। बंगाल, महाराष्ट्र समेत 6 राज्यों ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन भी लगा दी है। ग्लोबल क्लाइमेट एक्टविस्ट ग्रेटा थनबर्ग ने भी ट्वीट कर एंट्रेंस टेस्ट को अनुचित करार दिया है।
- दूसरी ओर, देशभर के 100 से ज्यादा शिक्षकों ने एंट्रेंस टेस्ट का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। आईआईटी के डायरेक्टर भी सामने आकर एंट्रेंस टेस्ट जल्द से जल्द कराने का समर्थन कर रहे हैं।
- केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक का कहना है कि मुझे रोजाना अनगिनत मेल ऐसे स्टूडेंट्स के आते हैं, जो इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहे। लेकिन, वे किसी भी सूरत में यह नहीं चाहते कि इस साल जीरो ईयर घोषित हो।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का क्या कहना है?
- सुप्रीम कोर्ट ने 17 अगस्त को NEET और JEE मेन्स एंट्रेंस टालने की याचिका खारिज कर दी। कहा कि ये छात्रों के भविष्य का सवाल है। उसे दांव पर नहीं लगा सकते। छात्रों को भी अपने एक साल को बर्बाद नहीं होने देना चाहिए।
- 11 राज्यों के छात्रों ने JEE और NEET स्थगित करने की मांग की थी। याचिका में मांग की गई है कि देश में कोरोना महामारी के बीच परीक्षाओं का आयोजन न किया जाए। ऐसे में फिलहाल परीक्षाओं की निर्धारित तारीखों को स्थगित कर दिया जाए।
एंट्रेंस टेस्ट की व्यवस्था पर सरकार का क्या कहना है?
- कोरोना के खतरे को देखते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने अलग से गाइडलाइन जारी की है। जेईई परीक्षा के लिए 8.58 लाख में से 7.5 लाख कैंडिडेट्स एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके हैं। नीट के लिए 15.97 लाख में से 10 लाख ने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लिया है।
- NEET और JEE के परीक्षा केंद्र बढ़ाए गए हैं। JEE 570 सेंटरों पर होनी थी, अब यह 660 सेंटर्स पर होगी। NEET के परीक्षा सेंटरों की संख्या 2546 से बढ़ाकर 3842 कर दी गई है। स्टूडेंट्स को वही सेंटर अलॉट किया जा गया है जो उन्होंने चुना है।
किस तरह बदली-बदली होगी व्यवस्था इस बार?
- NEET और JEE के दौरान हर बार तलाशी को लेकर सख्ती सुर्खियों में रहती थी। इस बार हाथ से तलाशी नहीं होगी बल्कि हैंडहेल्ड मशीन से होगी। यह इस बार का सबसे बड़ा बदलाव होगा, जो छात्रों को एग्जाम सेंटर पर देखने को मिलेगा।
- NEET में एक रूम में 24 की जगह 12 उम्मीदवार बैठेंगे। उम्मीदवारों के बीच छह फीट की दूरी तय की गई है। JEE में एक-एक सीट छोड़कर छात्रों को बिठाया जाएगा। सेंटर पर हर उम्मीदवार को नया मास्क और ग्ल्ब्ज दिए जाएंगे।
- JEE की एक पाली में 1.32 लाख की जगह अब 85 हजार उम्मीदवार बैठेंगे। कुल शिफ्ट 8 से बढ़ाकर 12 कर दी गई है। उन्हें पानी की पारदर्शी बोतल, सेनेटाइजर की छोटी बोतल ले जाने की अनुमति होगी।
- एग्जामिनेशन हॉल के बाहर सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करने के लिए उम्मीदवारों की इंट्री और एक्जिट एक साथ नहीं होगी। इंतजार कर रहे स्टूडेंट्स सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, इसके लिए एग्जाम हॉल के बाहर भी व्यवस्था रहेगी।

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