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Friday, 31 July 2020
चंडीगढ़ में पंजाब एमएलए हॉस्टल के बाहर गोली चलने से कांस्टेबल की मौत, पुलिस जांच जारी
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देहरादून: पीएनबी का एटीएम तोड़ने का प्रयास, अलार्म बजते ही भागे बदमाश
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ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़ा एक नया चैप्टर जोड़ा गया, पिछले साल जारी किए गए ड्राफ्ट में यह चैप्टर नहीं था
केंद्र सरकार ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी। देश की शिक्षा नीति में 34 सालों बाद यह बदलाव हुआ है। इसमें प्राइमरी एजुकेशन से लेकर रिसर्च लेवल तक के बदलाव शामिल हैं।
अब तक यही समझा जा रहा है कि 2020 में आई नई शिक्षा नीति पूरी तरह 2019 में आए ड्राफ्ट के आधार पर ही तैयार की गई है। लेकिन, यह पूरी तरह सही नहीं है। नई शिक्षा नीति पर कोविड-19 महामारी का भी असर हुआ है। ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़ा एक नया चैप्टर साल 2020 में ही जोड़ा गया है।
2019 के ड्राफ्ट में कुल 23 चैप्टर थे। जबकि बुधवार को जारी की गई नई शिक्षा नीति में 24 चैप्टर हैं। यह 24वां चैप्टर है Online and Digital Education: Ensuring Equitable Use of Technology यानी सभी के लिए तकनीक का उपयोग सुनिश्चित करना।
क्या है इस नए चैप्टर में?
सरकार की तरफ से जारी किए गए नई शिक्षा नीति के आधिकारिक दस्तावेज में इस चैप्टर को लेकर लिखा है: महामारी से उपजी परिस्थितियों से यह पता चला कि शिक्षा के पारंपरिक तरीकों के अलावा हमें नए विकल्पों की भी जरूरत है, इसलिए इसे जोड़ा गया।
नई शिक्षा नीति की ड्राफ्ट कमेटी के सदस्य आर.एस कुरील कहते हैं: यह चैप्टर ड्राफ्ट में नहीं था। सरकार ने बाद में महामारी से उपजी परिस्थितियों को देखते हुए इसे जोड़ा है। हालांकि, यह बदलाव वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए तो सही है ही। इसके भविष्य में भी अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
देश में डिजिटल डिवाइड है
ऑनलाइन एजुकेशन पर जोर दिए जाने के साथ पॉलिसी में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन एजुकेशन का हम पूरी तरह फायदा तब तक नहीं उठा सकते, जब तक देश में डिजिटल डिवाइड है। डिजिटल डिवाइड से सीधा मतलब है अधिकतर लोगों के पास ऑनलाइन एजुकेशन के लिए संसाधन उपलब्ध न होना।
सात चरणों में तैयार होगा ऑनलाइन एजुकेशन का ढांचा
- ऑनलाइन एजुकेशन से जुड़े इस नए चैप्टर में सात चरणों के बारे में बताया गया है। जिनके तहत देश में ऑनलाइन एजुकेशन का ढांचा तैयार किया जाएगा।
- NETF, CIET, NIOS, IGNOU, IITs, NITs के जरिए ऑनलाइन एजुकेशन के पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे।
- देश में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा।
- SWAYAM, DIKSHA जैसे ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स को पहले से ज्यादा यूजर फ्रेंडली बनाया जाएगा।
- डिजिटल कंटेंट का एक बड़ा भंडार तैयार किया जाएगा। जिसमें नए कोर्स-वर्क, लर्निंग गेम्स आदि डेवलप किए जाएंगे।
- डिजिटल डिवाइड को देखते हुए टेलीविजन, रेडियो और कम्युनिटी रेडियो के माध्यम से भी ई-लर्निंग कंटेंट उपलब्ध कराया जाएगा।
- DIKSHA, SWAYAM और SWAYAMPRABHA जैसे ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स के जरिए वर्चुअल लैब तैयार होंगे। जिनसे ऑनलाइन ही स्टूडेंट्स प्रैक्टिकल और एक्सपेरिमेंट्स भी कर सकें।
- टीचर्स को सिखाया जाएगा कि वे किस एक ऑनलाइन एजुकेशन के लिए कंटेंट क्रिएटर बन सकते हैं।
एक्सपर्ट की राय

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चंडीगढ़: दो फल विक्रेताओं पर बेसबॉल बेसबॉल से हमला, बदमाशों ने लूटे 30 हजार
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दुष्कर्म के बाद सास से की अमानवीयता, अस्पताल में तोड़ा दम
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देहरादून: कांग्रेस नेता के भाई सचिन उपाध्याय के खिलाफ धोखाधड़ी का एक और मुकदमा दर्ज
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मौजूदा माहौल में स्टूडेंट्स के लिए प्लानिंग, प्रैक्टिस और पेशेंस जरूरी, परेशानी खत्म करने के लिए अपनाएं यह टिप्स
इस लॉकडाउन से न केवल भारत में, बल्कि दुनियाभर में शिक्षा जगत पर गहरा प्रभाव पड़ा है। कहीं ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं तो कई कॉलेज ने परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। जानिए, इस दौर में छात्र क्या करें जिससे दिक्कतें खत्म हो सकें।
ये हैं परेशानियां
तकनीक : टेक्नोलॉजी के बढ़ते प्रयोग के साथ ही हर छात्र को अब इंटरनेट और स्मार्टफोन की जरूरत है। उनमें तकनीकी ज्ञान भी जरूरी है, ताकि वह अन्य की तुलना में पीछे न रह जाएं।
तनाव : भविष्य में आने वाले बदलाव की कोई जानकारी नहीं है, इसीलिए कई प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों, शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण नहीं दिया जा सकता।
सुरक्षा : स्कूल या कॉलेज पुनः प्रारंभ होने पर भी छात्रों को सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य रहेगा, जिससे पूर्व की तरह सामान्य रूप से पढ़ाई या परीक्षाएं आयोजित करना संभव नहीं।
फील्ड-वर्क : डिजिटल क्लास फील्ड ट्रिप, लैब एक्सपेरिमेंट और आउटडोर एक्टिविटी जैसे अनुभवों की जगह नहीं ले सकते हैं।
रुकावट : पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित हुआ है। फिर से शैक्षणिक सत्र का संचालन और शिक्षा के नुकसान से बचाव जरूरी है।
ये होंगे समाधान
प्लानिंग : छात्रों को आत्मनिरीक्षण कर इन स्थितियों में अवसरों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना चाहिए, जिससे वे अपनी कमजोरियों और क्षमताओं के मद्देनजर प्लानिंग तैयार कर सकें।
प्रैक्टिस : वीडियो लैक्चर, नोट्स डाउनलोड कर, मुफ्त मॉक टेस्ट, ऑनलाइन क्विज से इस अवसर का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं। कठिन विषयों के लिए पोर्टलों का उपयोग कर सकते हैं।
पेशेंस एंड स्किल्स: जॉब्स में पेशेंस के साथ जटिल निर्णय लेना, बातचीत में कुशल, टेक्नो अपडेट को परखा जाएगा। इसके लिए जीडी, शतरंज, स्क्रैबल, स्पेल-बी का इस्तेमाल करें।
डाइवर्ट : सोशल मीडिया या लगातार ऑनलाइन शो देखने से बचें। एप Forest का यूज आपको बताएगा कि आपने कितनी देर क्या किया।
फिटनेस : स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ दिमाग होता है। इसलिए, छात्रों को व्यायाम करने और खुद को फिट रखने की आवश्यकता है।
ये होंगे मददगार
- ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में दाखिला लें, वीडियो देख जीडी में भाग ले सकते हैं।
- ऑनलाइन चैनल जैसे कि स्वयं प्रभा और ज्ञान दर्शन जैसे टीवी चैनलों से जुड़ें।
- दूरदर्शन क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से 2.5 घंटे की वर्चुअल कक्षाएं प्रसारित कर रहा है।
- ऑल इंडिया रेडियो रोजाना 30 मिनट की शैक्षिक सामग्री प्रसारित करता है, उसे सुनें।
- कई विश्वविद्यालय ने डिस्टेंस लर्निंग शुरू की है। स्थिति सुधरने पर कैम्पस जा सकते हैं।
- डुओलिंगो जैसे कुछ एप्प TOEFL और IELTS के विकल्प के रूप में सेवा दे रहे हैं।
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लखनऊः विश्वास ट्रेडिंग कंपनी ने 14.60 करोड़ रुपये ठगे, केस दर्ज
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स्कूलों के क्लस्टर बनेंगे; शिक्षक समेत सभी संसाधन साझा हो सकेंगे, प्रोफेशनल और क्वालिटी लेवल के लिए गठित होगी स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथाॅरिटी
नई शिक्षा नीति में सरकारी स्कूलाें के प्रशासन में बड़ा बदलाव किया गया है। अब काॅम्प्लेक्स या क्लस्टर के ताैर पर स्कूलाें का प्रबंधन होगा। ये क्लस्टर स्कूल शिक्षा में गवर्नेंस की मूल इकाई हाेंगे। स्कूल काॅम्प्लेक्स के तहत आसपास के छाेटे स्कूलाें काे एक सांगठनिक और प्रशासनिक इकाई के तहत लाया जाएगा। एक सेकंडरी स्कूल इनमें प्रमुख हाेगा, जबकि उसके आसपास के इलाके के सभी सरकारी स्कूल इसके तहत आएंगे। इससे इन सभी स्कूलाें के संसाधनाें काे आपस में साझा करने में मदद मिलेगी।
शिक्षक समेत सभी संसाधन हो सकेंगे साझा
एक प्रबंधन हाेने के चलते इन स्कूलाें में पुस्तकालय, प्रयाेगशाला, साेशल वर्कर, काउंसलर और विशेष विषयाें के शिक्षकाें जैसे संसाधन साझा किए जा सकेंगे। इसके अलावा देशभर में एक सरकारी और एक निजी स्कूल काे साथ जाेड़ने की बात भी नीति में है। स्कूल की मुफ्त बुनियादी सुविधाओं का इस्तेमाल सामाजिक चेतना केंद्रों के रूप में भी करने की बात नीति में शामिल की गई है।
SSSA का होगी गठन
यह सामाजिक, बाैद्धिक और स्वयंसेवी गतिविधियाें काे बढ़ावा देगा। स्कूलाें के लिए शाॅर्ट टर्म और लाॅन्ग टर्म प्लान भी तैयार करेंगे। स्कूलाें के लिए मानक तय करने और मान्यता देने इत्यादि में भी नई शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है। इसके लिए राज्याें और केंद्र शासित प्रदेशाें काे स्वतंत्र स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथाॅरिटी (एसएसएसए) गठित करनी हाेगी।
एसएसएसए सुनिश्चित करेगा कि सभी स्कूल एक निश्चित स्तर तक पेशेवर और गुणवत्ता मानकाें का पालन करें। सरकारी और निजी स्कूलाें का मूल्यांकन एक जैसे क्राइटेरिया के आधार पर ही किया जाएगा। प्राइवेट और धर्मार्थ ट्रस्टाें के स्कूलाें काे बढ़ावा दिया जाएगा।
विशेषज्ञों की क्या राय है?
आईआईटी दिल्ली के डायरेक्टर वी रामगोपाल राव, प्रो. टीवी कट्टिमनी, एजुकेशन पॉलिसी ड्रॉफ्टिंग कमेटी के मेंबर प्रो. एमके श्रीधर, फिक्की की असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल शोभा मिश्रा घोष के एक्सपर्ट पैनल से जानें शिक्षा नीति से जुड़े सवालों के जवाब।
नई नीति कब लागू हाेगी? क्या पढ़ाई का पैटर्न एकाएक बदल जाएगा?
एकदम नहीं बदलेगा। एक दशक में धीरे-धीरे बदलाव हाेगा। जैसे 10वीं की परीक्षा का नया पैटर्न 2022-23 तक आएगा। 2024-25 में 12वीं का नया पैटर्न आएगा। प्री-प्राइमरी की शिक्षा और पहली कक्षा के लिए 3 महीने का प्रीपेरेटरी माॅड्यूल सिस्टम अगले सत्र, यानी 2021-22 से ही लागू हाे जाएगा। 2023-24 में 3 साल के बच्चाें काे आंगनवाड़ी में लाना सुनिश्चित होगा।
मेडिकल या इंजीनियरिंग की पढ़ाई की अवधि या पैटर्न में बदलाव हाेगा?
नहीं। लेकिन, इंटर्नशिप कठिन हो जाएगी। क्योंकि नई नीति में व्यावहारिक ज्ञान पर फोकस रहेगा। इससे डॉक्टरों की प्रैक्टिकल नॉलेज और बढ़ जाएगी। इसी तरह, जेईई और अन्य इंजीनियरिंग काेर्साें में भी प्रैक्टिकल नॉलेज पर जाेर रहेगा। इससे राेजगार के माैके बढ़ेंगे।
क्या बाेर्ड परीक्षा खत्म हाे जाएगी?
परीक्षाएं हाेती रहेंगी। लेकिन, मूल्यांकन की अप्राेच बदल जाएगी। तीसरी, पांचवीं और आठवीं कक्षा में सभी बच्चाें की परीक्षा हाेगी। 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा जारी रहेगी, लेकिन मूल्यांकन के मानक तय करने के लिए नया राष्ट्रीय आकलन केंद्र ‘परख’ स्थापित किया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया में पूरी तरह बदलाव में एक साल लगेगा। 2022-23 के सेशन तक अध्यापकाें काे भी विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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अब स्कूलों में 5वीं तक मातृभाषा में होगी पढ़ाई, इंग्लिश मीडियम में पढ़ाई की अनिवार्यता खत्म, संस्कृत के साथ तीन भारतीय भाषाओं का होगा विकल्प
34 साल बाद शिक्षा नीति में हुए बदलाव में सरकार ने भाषा से जुड़े भी कई अहम बदलाव किए हैं। इसके तहत सरकार ने त्रिभाषा फार्मूला अपनाया है। यानी कि अब बच्चों के लिए पांचवी तक उनकी मातृभाषा क्षेत्रीय या स्थानीय भाषा का उपयोग किया जाएगा। हालांकि किया पर भी यह भाषा थोपी नहीं जाएगी।
किसी पर थोपी नहीं जाएगी भाषा
इस बारे में एजुकेशन पॉलिसी ड्राफ्टिंग कमिटी के अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन कहते है कि पांचवी तक मातृभाषा में पढ़ाई करना किसी पर भी भाषा थोपना नहीं है। वे कहते हैं कि कक्षा पांचवी तक शिक्षा के माध्यम के रूप में स्थानीय भाषाओं को अपनाना शिक्षा के शुरुआती चरण में महत्वपूर्ण है। इस उम्र में सिद्धांतों को समझना और रचनात्मकता प्रदर्शित करने में बच्चे की ताकत बेहतर ढंग से प्रदर्शित होती है।
स्कूलों में होगा त्रिभाषा फॉर्मूला
स्कूली शिक्षा में अब त्रिभाषा फॉर्मूला चलेगा। इसमें संस्कृत के साथ अन्य तीन भारतीय भाषाओं का विकल्प होगा। साथ ही इलेक्टिव में विदेशी भाषा चुनने की भी आजादी होगी। यह पहली बार होगा जब भारतीय भाषाओं को तवज्जो देने के साथ उसे सहेजने और लुप्त होती भाषाओं को बचाने पर जोर दिया जाएगा।
त्रि-भाषा फार्मूला क्या है?
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नई शिक्षा नीति में कम से कम कक्षा 5 तक बच्चों से बातचीत का माध्यम मातृभाषा/स्थानीय भाषा/ क्षेत्रीय भाषा रहेगी।
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छात्रों को स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत को विकल्प के रूप में चुनने का अवसर मिलेगा। त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्प शामिल होगा।
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पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प होंगे। कई विदेशी भाषाओं को भी माध्यमिक शिक्षा स्तर पर एक विकल्प के रूप में चुना जा सकेगा।
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भारतीय संकेत भाषा यानी साइन लैंग्वेज को मानकीकृत किया जाएगा और बधिर छात्रों के इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पाठ्यक्रम सामग्री विकसित की जाएंगी।
केंद्र सरकार ने दी नई शिक्षा नीति को मंजूरी
बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 को मंजूरी दे दी। इसके तहत कई बड़े बदलाव किए गए हैं। स्टूडेंट्स अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी ऑनलाइन कोर्स कर सकेंगे। आठ प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं के अलावा कन्नड़, उड़िया और बंगाली में भी ऑनलाइन कोर्स लॉन्च किए जाएंगे। वहीं, नई शिक्षा नीति में GDP का 6% हिस्सा एजुकेशन सेक्टर पर खर्च किए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जो वर्तमान में केंद्र और राज्य को मिलाकर कुल 4.43% है।
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जेल से खौफ फैला रहा ये कुख्यात बदमाश, करा चुका कई बड़ी वारदात, अब चार और लोग निशाने पर
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मोदी सरकार UGC, AICTE और NCTE को खत्म करेगी, अब देश में सिर्फ एक रेगुलेटरी बॉडी हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया होगी
केंद्रीय सरकार ने बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नई शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) को मंजूरी दे दी। 1986 के बाद पहली बार यानी 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति बदलाव किया गया है। इसके तहत बच्चे के प्राइमरी स्कूल में एडमिशन से लेकर हायर एजुकेशन और फिर जॉब फोर्स से जुड़ने तक काफी बदलाव किए गए हैं।
हायर एजुकेशन के लिए देश में एक ही रेगुलेटर
उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अब देश में हायर एजुकेशन के लिए एक ही रेगुलेटरी बॉडी होगी। वर्तमान में हायर एजुकेशन के लिए UGC,AICTE और NCTE जैसी रेगुलेटरी बॉडी काम करती है। लेकिन अब इन्हें खत्म कर हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) स्थापित किया जाएगा, जो चार वर्टिकल में काम करेगा।
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नेशनल हायर एजुकेशन रेगुलेटरी काउंसिल (NHERC)- यह टीचर एजुकेशन समेत हायर एजुकेशन की फील्ड में सामान्य और सिंगल प्वाइंट रेगुलेटर के रूप में कार्य करेगा। हालांकि, मेडिकल और लॉ एजुकेशन इससे बाहर होंगे।
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नेशनल एक्रीडिटेशन काउंसिल (NAC)- इसके तहत इंस्टिट्यूट का सत्यापन मुख्य रूप से बुनियादी मानदंडों, पब्लिक डिस्क्लोजर, सुशासन और परिणामों पर आधारित होगा। इसकी निगरानी के लिए NAC द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों के एक इंडिपेंडेंस इकोसिस्टम को स्थापित किया जाएगा।
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हायर एजुकेशन ग्रांट्स काउंसिल (HEGC)- HECI का यह तीसरा वर्टिकल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की फंडिंग और फाइनेंसिंग का काम करेगा।
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जनरल एजुकेशन काउंसिल (GEC)- HECI का यह चौथा वर्टिकल हायर एजुकेशन प्रोग्राम के लिए अपेक्षित परिणाम प्राप्त करेगा, जिसे ग्रेजुएट एट्रिब्यूट कहा जाता है। इसके अलावा GEC नेशनल हायर एजुकेशन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (NHEQF) भी तैयार किया जाएगा
मल्टीपल एंट्री और एग्जिट
मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का विकल्प इसके तहत स्टूडेंट्स एक साथ दो कोर्स कर पाएंगे। इतना ही नहीं वे जब चाहे इस कोर्स को छोड़ भी सकते हैं इसके अलावा 5 साल का इंटीग्रेटेड कोर्स करने वाले स्टूडेंट्स के लिए अब एम. फिल करना अनिवार्य नहीं होगा।
बीच में पढ़ाई छोड़ने पर भी मिलेगा सर्टिफिकेट
इसके अलावा बीच में ही कॉलेज की पढ़ाई छोड़ने पर स्टूडेंट का साल बर्बाद ना हो, इसके लिए भी नियम बनाएं गए हैं। अब कॉलेज में फर्स्ट ईयर तक पढ़ाई पूरी करने पर सर्टिफिकेट, सेकंड ईयर पूरा करने पर एडवांस डिप्लोमा, थर्ड ईयर करने पर डिग्री और फोर्थ ईयर पूरा होने पर बैचलर्स डिग्री के साथ रिसर्च सर्टिफिकेट दिया जाएगा।
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Thursday, 30 July 2020
शरारती तत्वों ने मंदिर में लगाई आग, पुजारी को भी जिंदा जलाने का प्रयास
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28 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर देहरादून के तीन युवकों ने सनसनीखेज़ वारदात को दिया अंजाम
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यूपी: पहले सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म, फिर गला घोंटकर मार डाला, आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज
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आतंकियों के निशाने पर मुख्यमंत्री योगी का शहर, हाई अलर्ट जारी
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देररात बरला में भी हुई मुठभेड़, दो लुटेरे जख्मी
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यूपी: युवती की हत्या कर नाले में फेंका शव, पुलिस को इस बात का है शक
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन ने रद्द की प्रवेश परीक्षा, मेरिट और ऑनलाइन इंटरव्यू के आधार पर होगा एडमिशन
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन (IIMC) ने पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाले एंट्रेंस एग्जाम को रद्द कर दिया है। संस्थान के इस फैसले के बाद अब IIMC में पीजी डिप्लोमा कोर्सेस में मेरिट के आधार पर एडमिशन दिया जाएगा। आधारित प्रवेश प्रक्रिया को अपनाते हुए क्वालिफाईंग एग्जाम में उम्मीदवारों के अंकों के आधार पर प्रवेश देने का निर्णय किया है। दरअसल, देश में कोरोना के कारण बने हालातों को देखते हुए लिया है।
ऑनलाइन इंटरव्यू भी होगा
इंस्टीट्यूट ने इस बारे में नोटिफिकेशन जारी कर बताया कि अब उम्मीदवारों को क्वालिफाईंग परीक्षा यानी ग्रेजुएशन के साथ ही इंटरमीडिएट और मैट्रिकुलेशन परीक्षाओं के मार्क्स के वेटेज के आधार पर एडमिशन दिया जाएगा। इसके बाद संस्थान द्वारा ऑनलाइन इंटरव्यू का आयोजन किया जाएगा।
नए सत्र से ऑनलाइन होगी क्लासेस
IIMC की तरफ से जारी विज्ञप्ति के मुताबिक नए सत्र में सभी पाठ्यक्रमों में पहले सेमेस्टर के लिए कक्षाओं का आयोजन ऑनलाइन मोड से किया जाएगा। ऑनलाइन क्लासेस के लिए शेड्यूल बाद में जारी किया जाएगा। वहीं, ऑनलाइन कक्षाओं के लिए आवश्यक लैपटॉप या कंप्यूटर और इंटरनेट की व्यवस्था स्टूडेंट्स को खुद करनी होगी, ताकि महामारी के दौर में उनके शैक्षणिक कार्य जारी रखें जा सकें।

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महराजगंज: संविदा चिकित्सक को जान से मारने की धमकी, मुकदमा दर्ज
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सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में लागू होंगे एक जैसे नियम, बैग का बोझ होगा कम, प्रैक्टिकल और प्राब्लम सॉल्विंग पर फोकस
केंद्रीय सरकार द्वारा मंजूर नई शिक्षा नीति 2020 के बाद अब देश की शिक्षा प्रणाली में कई तरह के बदलाव किए गए हैं। इसका मकसद सभी बच्चों को साल 2030 स्कूली शिक्षा से जोड़ना या हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने कई बड़े बदलाव करते हुए पहली बार सरकारी और निजी स्कूलों में एक नियम लागू करने का फैसला किया है। अब राज्य स्कूल मानक प्राधिकरण में अब सभी सरकारी और निजी स्कूल शामिल होंगे। इससे प्राइवेट स्कूलों की फीस, पाठ्यक्रम तथा वेतन आदि पर लगाम लगेगी।
सरकार द्वारा लाई गई नई शिक्षा नीति के लक्ष्य
- ECCE (Early childhood care and education) से सेकंडरी सभी तक पहुँचना।
- सभी बच्चों के लिए निष्पक्षता और समावेशन सुनिश्चित करना।
- स्कूल छोड़ चुके 2 करोड़ बच्चों को वापस स्कूल लाना।
- माध्यमिक शिक्षा पूरी होने तक सभी बच्चों के लिए SDG लक्ष्यों को प्राप्त करना।
- सीखने के परिणामों की गुणवत्ता और उपलब्धि में सुधार करना।
- टीचिंग,लर्निंग और असेसमेंट में 21वीं सदी की स्किल्स पर फोकस करना।
- स्कूल परिसर में संसाधनों का साझाकरण
- सीखने की प्रक्रिया में भाषा की बाधा को पार करना
- सरकारी और प्राईवेट स्कूलों में शिक्षा के लिए सामान्य मानक तय करना।
फेल होने पर मिलेंगे दो से ज्यादा मौके
नई शिक्षा नीति में बोर्ड परीक्षा को पहले आसान बनाया गया है। अब 10वीं- 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 24 से ज्यादा विषय न हों। फेल या अच्छा प्रदर्शन न करने पर स्टूडेंट को दो या दो से ज्यादा मौके मिलेंगे। साथ ही अब स्टूडेंट्स 9वीं के बाद से ही विषय का चुनाव कर सकते हैं। इसके लिए NCERT अगले साल तक नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2020 तैयार करेगी। वर्तमान में स्कूली शिक्षा नेशनल कैरिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के तहत चल रही है।
स्टूडेंट्स का होगा एजुअल हेल्थ चेकअप
पढ़ाई के साथ ही बच्चों की फिजिकल और मेंटल हेल्थ स्वस्थ्य बनाए रखने के लिए हर साल हेल्थ चेकअप किया जाएगा। बच्चों को शारीरिक जांच के आधार पर हेल्थ कोर्ड भी मिलेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य की देखभाल के अलावा बुनियादी प्रशिक्षण में, मेंटल हेल्थ, प्राथमिक चिकित्सा, व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वच्छता को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
स्कूल बैग का बोझ होगा कम
पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र में उपयुक्त परिवर्तन के जरिए स्कूल बैग का वजन भी कम किया जाएगा। अब बच्चों को मोटी-मोटी किताबें नहीं पढ़नी पड़ेंगी। नई नीति के बाद बच्चों को हर विषय के कोर कंसेप्ट को आसान तरीकों से समझाया जाएगा। पढ़ाई का फोकस और कांस्पेट्स, आइडिया, एप्लिकेशन, प्रैक्टिकल, प्राब्लम साल्विंग पर रहेगा।
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पंजाब: अमृतसर में जहरीली शराब पीने से चार युवकों की मौत, दो की हालत गंभीर
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नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के बारे में वह सबकुछ जो आपके और आपके बच्चों के लिए जानना जरूरी है
केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को नई शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) को मंजूरी दे दी है। 1986 के बाद पहली बार यानी 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति बदल रही है। इसमें बच्चे के प्राइमरी स्कूल में एडमिशन से लेकर हायर एजुकेशन कर जॉब फोर्स से जुड़ने तक काफी बदलाव किए गए हैं। नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट इसरो के वैज्ञानिक रह चुके शिक्षाविद के. कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाली कमेटी ने बनाया है।
शिक्षा नीति लाने की जरूरत क्यों महसूस की गई?
- इससे पहले की शिक्षा नीति 1986 में बनाई गई थी। उसमें ही संशोधन किए गए थे। लंबे समय से बदले हुए परिदृश्य में नई नीति की मांग हो रही थी। 2005 में करिकुलम फ्रेमवर्क भी लागू किया गया था।
- एजुकेशन पॉलिसी एक कॉम्प्रेहेंसिव फ्रेमवर्क होता है जो देश में शिक्षा की दिशा तय करता है। यह पॉलिसी मोटे तौर पर दिशा बताता है और राज्य सरकारों से उम्मीद है कि वे इसे फॉलो करेंगे। हालांकि, उनके लिए यह करना अनिवार्य नहीं है।
- ऐसे में यह पॉलिसी सीबीएसई तो लागू करेगी ही, राज्यों में अपने-अपने स्तर पर फैसले लिए जाएंगे। यह बदलाव जल्द नहीं होंगे बल्कि इसमें समय लग सकता है। यह एक प्रक्रिया की शुरुआत के तौर पर देखा जाना चाहिए।
- स्कूल शिक्षा के लिए नेशनल करिकुलर फ्रेमवर्क के तौर पर स्कूल करिकुलम (एनसीएफएसई) का ओवरहॉल किया गया था। इसे नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एऩसीईआरटी) करेगा। एनसीएफएसई के आधार पर किताबों का रिवीजन होगा। एनसीईआरटी ने 2014 के बाद से दो बार स्कूल की टेक्स्टबुक का रिवीजन किया है।
और क्या नया और अलग होगा शिक्षा जगत में?
- नई शिक्षा नीति के तहत तकनीकी संस्थानों में भी आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज के विषय पढ़ाए जाएंगे। साथ ही देश के सभी कॉलेजों में म्यूजिक, थिएटर जैसे कला के विषयों के लिए अलग विभाग स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
- कैबिनेट ने एचआरडी (ह्यूमन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट) मिनिस्ट्री का नाम बदलकर मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन करने की मंजूरी भी दी है। दुनियाभर की बड़ी यूनिवर्सिटीज को भारत में अपना कैंपस बनाने की अनुमति भी दी जाएगी।
- IITs समेत देश भर के सभी तकनीकी संस्थान होलिस्टिक अप्रोच ( समग्र दृष्टिकोण) को अपनाएंगे। इंजीनियरिंग के साथ-साथ तकनीकी संस्थानों में आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज से जुड़े विषयों पर भी जोर दिया जाएगा। - देशभर के सभी इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए एक कॉमन एंट्रेंस एग्जाम आयोजित कराए जाने की बात भी कही गई है। यह एग्जाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कराएगी। हालांकि, यह ऑप्शनल होगा। सभी स्टूडेंट्स के लिए इस एग्जाम में शामिल होना अनिवार्य नहीं रहेगा।
- स्टूडेंट्स अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी ऑनलाइन कोर्स कर सकेंगे। आठ प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं के अलावा कन्नड़, उड़िया और बंगाली में भी ऑनलाइन कोर्स लॉन्च किए जाएंगे। वर्तमान में अधिकतर ऑनलाइन कोर्स इंग्लिश और हिंदी में ही उपलब्ध हैं।
- नई शिक्षा नीति में GDP का 6% हिस्सा एजुकेशन सेक्टर पर खर्च किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में केंद्र और राज्य को मिलाकर GDP का कुल 4.43% बजट ही शिक्षा पर खर्च किया जाता है।
पूरी शिक्षा नीति को समझने के लिए हमने देश के बड़े विशेषज्ञों से संपर्क किया और आपके लिए सरल भाषा में इस नीति को आपके सामने आसान Q&A फॉर्मेट में रख रहे हैं-
Q. स्कूल में पढ़ाई के ढांचे में किस तरह का बदलाव दिखेगा?
पूरी व्यवस्था ही बदल गई है। मौजूदा व्यवस्था में तीन स्तर है और नए सिस्टम में पांच स्तर। यह हर स्तर पर हुनरमंद नई पीढ़ी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी।
इसे ग्राफिक की मदद से इस तरह समझ सकते हैं -

- मौजूदा सिस्टम में 6 वर्ष का बच्चा कक्षा 1 में आता है। नए सिस्टम में ज्यादा बदलाव नहीं है। लेकिन इसके मूल ढांचे में थोड़ा बदलाव किया है।
- 6 से 9 वर्ष के बच्चों के लिए बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान पर फोकस होगा। इसके लिए नेशनल मिशन बनेगा। पूरा फोकस होगा कक्षा 3 तक के बच्चों का फाउंडेशन मजबूत बने।
- कक्षा 5 तक तक आते-आते बच्चे को भाषा और गणित के साथ उसके स्तर का सामान्य ज्ञान होगा। डिस्कवरी और इंटरेक्टिवनेस इसका आधार होगा यानी खेल-खेल में सारा सिखाया जाएगा।
- कक्षा 6-8 तक के लिए मल्टी डिसीप्लीनरी कोर्स होंगे। एक्टिविटीज के जरिये पढ़ाएंगे। कक्षा 6 के बच्चों को कोडिंग सिखाएंगे। 8वीं तक के बच्चों को प्रयोग के आधार पर सिखाया जाएगा।
- कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों के लिए मल्टी-डिसीप्लीनरी कोर्स होंगे। यदि बच्चे की रुचि संगीत में है, तो वह साइंस के साथ म्यूजिक ले सकेगा। केमेस्ट्री के साथ बेकरी, कुकिंग भी कर सकेगा।
- कक्षा 9-12 में प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग पर जोर होगा। इससे जब बच्चा 12वीं पास करके निकलेगा, तो उसके पास एक स्किल ऐसा होगा, जो आगे चलकर आजीविका के रूप में काम आ सकता है।
- आकाश एजुकेशनल सर्विसेस लिमिटेड के सीईओ आकाश चौधरी के मुताबिक नई व्यवस्था हुनर-आधारित शिक्षा का महत्व बढ़ाएगी। युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी।
Q. बोर्ड परीक्षाओं का क्या होगा?
- नई शिक्षा नीति में नियमित और क्रिएटिव असेसमेंट की बात कही गई है। कक्षा 3, 5 और 8 में स्कूली परीक्षाएं होंगी। इसे उपयुक्त प्राधिकरण संचालित करेगा।
- कक्षा 10 एवं 12 की बोर्ड परीक्षाएं जारी रहेंगी। इनका स्वरूप बदल जाएगा। नया नेशनल असेसमेंट सेंटर ‘परख’ मानक-निर्धारक निकाय के रूप में स्थापित किया जाएगा।
Q. ECCE फ्रेमवर्क क्या है, जिसकी चर्चा हो रही है?
- ECCE का मतलब है अर्ली चाइल्डहुड केयर एंड एजुकेशन। इसके तहत बच्चे को बचपन में जिस देखभाल की आवश्यकता होती है उसे शिक्षा के साथ जोड़ा गया है।
- NCERT इसके लिए नेशनल कोर्स और एजुकेशनल स्ट्रक्चर बनाएगा। बच्चों की देखभाल और पढ़ाई पर फोकस रहेगा। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और बेसिक टीचर्स को स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी।
- तीन से आठ वर्ष आयु के बच्चों को दो हिस्सों में बांटा है। पहले हिस्से में यानी 3-6 वर्ष तक बच्चा ECCE में रहेगा। इसके बाद 8 वर्ष का होने तक वह प्राइमरी में पढ़ेगा।
Q. ओपन लर्निंग ऑप्शन क्या है?
- कक्षा 3, 5 और 8 के लिए ओपन लर्निंग का विकल्प रहेगा। ताकि स्कूलों से बाहर रह रहे दो करोड़ छात्रों को फिर पढ़ाई से जोड़ा जा सके। इसके लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी जोड़ा जाएगा।
- इसके साथ-साथ, कक्षा 10 और 12 के समकक्ष माध्यमिक शिक्षा कार्यक्रम, वोकेशनल कोर्सेस, वयस्क साक्षरता और लाइवलीहुड प्रोग्राम प्रस्तावित है।
- सभी को पढ़ाई पर बराबरी से हक मिले इसके लिए सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से वंचित ग्रुप्स (SEDG) पर विशेष जोर रहेगा। इसके लिए विशेष फंड रखा जाएगा।
Q. इंटर्नशिप का क्या कंसेप्ट है?
- फिलहाल शिक्षा का फोकस इस बात पर है कि कैसे लाभ हासिल किया जाए। लेकिन नए सिस्टम में पूरा फोकस व्यवहार पर आधारित शिक्षा पर होगा।
- स्कूलों में कक्षा 6 से ही व्यवसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी। इसमें इंटर्नशिप भी शामिल होगी। ताकि बच्चों को पास के किसी उद्योग या संस्था में ले जाकर फर्स्टहेंड एक्सपीरियंस दिया जा सकेगा।
त्रि-भाषा फार्मूला क्या है?
- नई शिक्षा नीति में कम से कम कक्षा 5 तक बच्चों से बातचीत का माध्यम मातृभाषा/स्थानीय भाषा/ क्षेत्रीय भाषा रहेगी।
- छात्रों को स्कूल के सभी स्तरों और उच्च शिक्षा में संस्कृत को विकल्प के रूप में चुनने का अवसर मिलेगा। त्रि-भाषा फॉर्मूले में भी यह विकल्प शामिल होगा।
- पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प होंगे। कई विदेशी भाषाओं को भी माध्यमिक शिक्षा स्तर पर एक विकल्प के रूप में चुना जा सकेगा।
- भारतीय संकेत भाषा यानी साइन लैंग्वेज को मानकीकृत किया जाएगा और बधिर छात्रों के इस्तेमाल के लिए राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय पाठ्यक्रम सामग्री विकसित की जाएंगी।
Q. स्कूलों का ढांचा किस तरह बदलेगा?
- स्कूलों के प्रशासनिक ढांचे को कई स्तरों पर बदला जा रहा है। स्कूलों को परिसरों या क्लस्टरों में बांटा जा सकता है, जो गवर्नेंस की मूल इकाई होगा।
- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश स्वतंत्र स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी बनाएंगे। एससीईआरटी सभी संबंधितों से परामर्श कर स्कूल क्वालिटी असेसमेंट फॉर्मेट बनाएगी।
Q. हायर एजुकेशन के लिए क्या सोचा है?
- सबसे पहले तो एनरोलमेंट बढ़ाना है। वोकेशनल के साथ-साथ हायर एजुकेशन में एनरोलमेंट 26.3 प्रतिशत (2018) से बढ़ाकर 2035 तक 50 प्रतिशत करना है। 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ेंगे।
- कॉलेज में एक्जिट विकल्प होंगे। अंडर-ग्रेजुएट शिक्षा 3-4 वर्ष की होगी। एक साल पर सर्टिफिकेट, 2 वर्षों पर एडवांस डिप्लोमा, 3 वर्षों पर ग्रेजुएट डिग्री तथा 4 वर्षों के बाद शोध के साथ ग्रेजुएट।
- एक एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट की स्थापना की जानी है, जिससे कि इन्हें अर्जित अंतिम डिग्री की दिशा में अंतरित एवं गणना की जा सके।
Q. कॉलेजों/यूनिवर्सिटी का Q. ढांचा किस तरह बदलेगा?
- चिकित्सा एवं कानूनी शिक्षा को छोड़कर समस्त हायर एजुकेशन के लिए हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बनाया जाएगा। यह यूजीसी की जगह लेगा।
- आईआईटी और आईआईएम के दर्जे की मल्टी-डिसीप्लीनरी एजुकेशन और रिसर्च यूनिवर्सिटी बनाई जाएगी। यह ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को फॉलो करेगी।
- टॉप बॉडी के रूप में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाया जाएगा, जिसका उद्देश्य हायर एजुकेशन में रिसर्च को एक कल्चर के रूप में विकसित करना और क्षमता बढ़ाना होगा।
- यूनिवर्सिटी की परिभाषा भी बदलने वाली है। इसमें रिसर्च-फोकस्ड यूनिवर्सिटी से टीचिंग-फोकस्ड यूनिवर्सिटी और डिग्री देने वाले स्वायत्त कॉलेज शामिल होंगे।
- 15 साल में धीरे-धीरे कॉलेजों की संबद्धता खत्म की जाएगी। उन्हें धीरे-धीरे स्वायत्त बनाया जाएगा। यह कॉलेज आगे चलकर डिग्री देने वाले स्वायत्त कॉलेज बनेंगे या किसी यूनिवर्सिटी से जुड़े कॉलेज।
- एनसीईआरटी की मदद से एनसीटीई टीचर्स ट्रेनिंग के लिए नया और व्यापक नेशनल करिकुलम स्ट्रक्चर तैयार करेगा। पढ़ाने के लिए न्यूनतम योग्यता 4 साल का इंटिग्रेटेड बीएड डिग्री होगी।
Q. ऑनलाइन एजुकेशन और विदेशी यूनिवर्सिटी के लिए क्या है?
- स्कूल-कॉलेजों के ऑनलाइन एजुकेशन की जरूरतों को पुरा करने के लिए मंत्रालय में एक डिजिटल स्ट्रक्चर, डिजिटल कंटेंट और कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए समर्पित यूनिट बनाई जाएगी।
- शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने के लिए टॉप ग्लोबल रैंकिंग रखने वाली यूनिवर्सिटी या कॉलेजों को भारत में अपनी ब्रांच खोलने की अनुमति दी जाएगी।
Q. नई नीति कब लागू होगी और बदलाव कब दिखेंगे?
- फिलहाल इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता। दरअसल, यह सभी बदलाव अगले कुछ वर्षों में दिखेंगे। इसके लिए कोई समय सीमा भी इस नीति में नहीं दी गई है।
- इस वजह से यह चिंता भी उठाई जा रही है कि सरकार ने नई शिक्षा नीति में जो वादे किए हैं, वह पूरे हो सकेंगे या नहीं। पहले भी बदलाव की बातें बस्तों से बाहर नहीं निकल सकी थी।
Q. विशेषज्ञों की क्या राय है?
- NCERT से जुड़ीं शिक्षाविद डॉ. किरण देवेंद्र का कहना है कि अधिकतर बदलाव 2005 में लागू नेशनल कुरिकुलम फ्रेमवर्क में भी थे। लेकिन इन्हें लागू करना बड़ी चुनौती होगी। नई शिक्षा नीति में ऑनलाइन एजुकेशन की बात है, लेकिन कई लोगों के पास साधन नहीं है। ऐसे में लागू करने से पहले उस पर गंभीरता से विचार करना होगा।
- जामिया मिलिया इस्लामिया की कुलपति प्रोफेसर नजमा अख्तर का कहना है कि SWAYAM जैसे प्लेटफॉर्म ऑनलाइन लर्निंग को बढ़ावा दे रहे हैं। नई शिक्षा के अच्छे परिणाम होंगे। हायर एजुकेशन में सभी शिक्षण संस्थानों के लिए एक रेगुलेटरी बॉडी स्थापित करने का फैसला सराहनीय है। यह बेहद जरूरी था।
- आकाश एजुकेशनल सर्विसेस लिमिटेड के सीईओ आकाश चौधरी ने कहा कि पूरी नीति भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इससे रटे-रटाए प्रश्नों के बजाय हुनरमंद बनाने पर जोर रहेगा। निश्चित ही इससे हम नॉलेज की सदी में अपना परचम फहराएंगे।
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मुजफ्फरनगर में वारदात: पूर्व प्रधान पति की फावड़ों से प्रहार कर हत्या, जांच में जुटे पुलिस अधिकारी
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10+2 फाॅर्मूला खत्म; अब 5+3+3+4 पैटर्न के आधार पर होगी पढ़ाई, 12वीं तक कुल 15 साल लगेंगे
केंद्र सरकार ने बुधवार काे नई शिक्षा नीति काे मंजूरी दे दी। इसमें स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई बड़े बदलाव हैं। अब स्कूली शिक्षा के लिए 10+2 फाॅर्मूले के बजाय 5+3+3+4 का पैटर्न अपनाया जाएगा। पांचवीं तक बच्चे मातृ भाषा या क्षेत्रीय भाषा में ही पढ़ेंगे। छात्राें काे मनपसंद विषय चुनने के कई विकल्प मिलेंगे। आर्ट्स-साइंस, करिकुलर-एक्स्ट्रा करिकुलर और व्यावसायिक- शैक्षणिक विषयों के बीच अंतर नहीं हाेगा। छठी से काेडिंग सिखाई जाएगी। छठी कक्षा से ही व्यावसायिक शिक्षा शुरू हो जाएगी। इसमें इंटर्नशिप भी शामिल होगी।
34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव
21वीं सदी में यह भारत की पहली शिक्षा नीति है। भारत ने 34 साल बाद अपनी शिक्षा नीति बदली है। इससे पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1986 में शिक्षा नीति बनवाई थी। शिक्षा नीति पर कैबिनेट बैठक में हुए फैसले की जानकारी देते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने बताया कि शिक्षा पर जीडीपी का 4.4% खर्च हो रहा है। इसे 6% किया जाएगा। नई शिक्षा नीति में मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय किया गया है।
ऐसे समझें 5+3+3+4 सिस्टम के मायने क्या?
3 साल की आंगनवाड़ी/प्री स्कूलिंग के साथ 12 साल की स्कूली शिक्षा होगी। इन वर्षों को 4 वर्गों में बांटा गया है। पहले वर्ग में 3 से 6 साल के छात्र होंगे। इन्हें प्री प्राइमरी से लेकर दूसरी तक शिक्षा दी जाएगी। दूसरे वर्ग में तीसरी से पांचवीं तक का पाठ्यक्रम होगा। तीसरे वर्ग में छठी से आठवीं के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इसी दाैरान सब्जेक्ट का इंट्रोडक्शन कराया जाएगा। चाैथे वर्ग में नाैंवी से 12वीं तक के छात्र आएंगे। इस दाैरान छात्रों को खास कई विषयों के साथ-साथ प्रैक्टिकल पर ध्यान दिया जाएगा।
अध्यापक के अलावा खुद छात्र और दोस्त भी करेंगे असेसमेंट
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: नया करिकुलम बनेगा। छात्र का असेसमेंट 3 स्तर पर होगा।
- पहला स्तर- छात्र खुद असेसमेंट करेगा।
- दूसरा- उसके साथी भी असेसमेंट करेंगे।
- तीसरा- अध्यापक असेसमेंट करेंगे। 12वीं पास करते समय पूरी स्कूली शिक्षा का असेसमेंट एआई की मदद से तैयार होगा।
- छठी से ही इंटर्नशिप: ताकि शुरू से व्यावसायिक शिक्षा शुरू हाे जाएगी।
- 3.5 करोड़ नई सीटें: ताकि उच्च शिक्षा से ज्यादा से ज्यादा बच्चे जुड़ सके।
- अपना पाठ्यक्रम भी: अंडर ग्रेजुएट कॉलेज अब और ज्यादा स्वायत्त बनाए जाएंगे। वे अपना सिलेबस और करिकुलम भी तय कर सकते हैं। कॉलेजों को मान्यता देने का सिस्टम 15 साल में खत्म होगा।
- बीएड कॉलेज बंद होंगे: चार साल का बीएड कोर्स होगा। बीएड कॉलेज बंद होंगे। सामान्य कॉलेज से ही बीएड डिग्री मिलेगी।
- नौकरी करने पर डिग्री में एक साल की छूट मिलेगी, एमफिल खत्म होगी: रिसर्च में जाने के लिए 4 साल का डिग्री प्रोग्राम होगा। जो लोग नौकरी करना चाहते हैं, वे तीन साल का ही डिग्री प्रोग्राम करेंगे। रिसर्च में जाने के लिए एक साल के एमए के साथ चार साल के डिग्री प्रोग्राम के बाद पीएचडी कर सकेंगे।
- शिक्षकों का पाठ्यक्रम: एनसीटीई अध्यापक शिक्षण के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा- एनसीएफटीई, 2021 तैयार करेगी।
- अलग-अलग संस्थाएं कॉलेजों का काम देखेंगी। फंडिग, स्टैंडर्ड सेटिंग, एक्रिडेशन, रेग्यूलेशन के लिए अलग संस्थाएं बनेंगी।
- वर्टिकल बनेंगे: उच्च शिक्षा के रेगुलेशन हल्के रहेंगे, पर सख्ती बढ़ेगी। एक रेगुलेटर में विभिन्न कार्याें के लिए 4 वर्टिकल बनेंगे
- विदेशी यूनिवर्सिटी आएंगी: शीर्ष रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटीज को ही भारत में कैंपस खोलने की इजाजत दी जाएगी।
साइंस के साथ इतिहास भी पढ़ सकेंगे
नई शिक्षा नीति के तहत साइंस के छात्र इतिहास या आर्ट्स के काेई अन्य सब्जेक्ट भी पढ़ सकेंगे। अगर छात्र को इसमें दिक्क्त होती है तो सब्जेक्ट ड्रॉप भी कर सकते हंै। लेकिन, पढ़ाई पूरी होने पर मुख्य सब्जेक्ट यानी आर्ट या साइंस संकाय के आधार पर ही डिग्री मिलेगी। नई शिक्षा नीति में यह बात अहम है कि अब छात्र छठी कक्षा से वाेकेशनल शिक्षा के साथ अप्रेंटिस भी करेंगे। जो छात्र 12वीं के बाद काम-धंधा शुरू करना चाहते हैं, उन्हें अप्रेंटिस से मिले व्यावहारिक ज्ञान से फायदा मिलेगा। -के. कस्तूरीरंगन, अध्यक्ष, ड्राफ्टिंग कमेटी
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आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस सिस्टम से जोड़ा जाएगा रिपोर्ट कार्ड, स्टूडेंट्स के लिए आठ भाषाओं में उपलब्ध होंगे ऑनलाइन ई-कोर्स
भारत सरकार द्वारा मंजूर की गई नई शिक्षा नीति के मुताबिक बच्चों का रिपोर्ट कार्ड आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस सिस्टम से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में रिपोर्ट कार्ड में सिर्फ दो ही पेज होते है। इसके पहले एक पेज पर मार्क्स लिखे होते हैं, जबकि दूसरी साइड पर बच्चों की परफॉर्मेस के बारे में कमेंट लिखे होते हैं। लेकिन अब नए रिपोर्ट कार्ड में तीन तरह के मूल्यांकन किए जाएंगे। इसमें पहला मूल्यांकन खुद बच्चे की तरफ से किया जाएगा। वहीं, दूसरा मूल्यांकन उसके सहपाठी करेंगे और तीसरा मूल्यांकन बच्चे के शिक्षक द्वारा किया जाएगा।
रिपोर्ट कार्ड में हर साल होगा लाइव स्किल की जिक्र
अब हर साल टीचर को इस रिपोर्ट कार्ड में लिखना होगा कि बच्चे में कौन सी लाइव स्किल जोड़ी जानी चाहिए। इसके लिए हर लाइफस्किल के ऊपर चर्चा करता हुआ रिपोर्ट कार्ड बनेगा और सेंट्रल डाटाबेस में उसे सेव किया जाएगा। जब बच्चा बारहवीं पास करके निकलेगा, तब आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस के जरिए यह बता सकेंगे कि पिछले पंद्रह साल में उसने क्या-क्या लाइफ स्किल हासिल किए हैं।
इसके लिए हर एक बच्चे का लर्निंग आउटकम ट्रैक किया जाएगा। नेशनल असेसमेंट सेंटर जिसका नाम 'परख' रखा गया है, वह देश के सभी स्कूल बोर्ड के लिए गाइडलाइन्स तैयार करेंगे। इसके अलावा टीचर के लिए नेशनल प्रोफेशनल स्टैंडर्ड तैयार किया जाएगा, जिसमें टीचर की रोल एक्सपेक्टेशन क्या है। इसका एक स्टैंडर्ड तैयार किया जाएगा, जो पूरे देश में लागू होगा।
आठ भाषाओं में होंगे ऑनलाइन ई-कोर्स
इतना ही नहीं स्टूडेंट्स के लिए कम से कम आठ भाषाओं में ऑनलाइन ई-कोर्स उपलब्ध कराए जाएंगे। असेसमेंट के लिए तकनीकियों का इस्तेमाल किया जाएगा। स्कूल- कॉलेजों में वर्चुअल लैब बनायेंगे, जिस पर आईआईटी मद्रास काम कर रहा है। साथ ही नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम स्थापित किया जाएगा, जिसमें प्राइवेट सेक्टर, गवर्नमेंट सेक्टर, शिक्षाविद, वैज्ञानिक आदि शामिल होंगे। वहीं, किताबें पढ़ना कितना जरूरी है, उस पर फोकस किया जाएगा। इसके लिए बुक्स रीडिंग एंड प्रमोशन पॉलिसी लागू होगी।
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गायक परिवार हत्याकांड: डीएनए रिपोर्ट में हुई ये पुष्टि, अब होगी बड़ी कार्रवाई, खौफनाक थी पूरी वारदात
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बिजनौर में दिनदहाड़े वारदात, 55 हजार की नगदी समेत दस लाख के स्टाम्प लूटकर फरार हुए बदमाश
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हिमाचल फ्रूट कंपनी के कार्यालय में पांच लाख की चोरी
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स्कूल के दौरान ही बच्चों को करनी होगी 10 दिन की इंटर्नशिप, कक्षा 3 से साइंटिफिक टेम्पर डेवलप करने के लिए तैयार होगा पाठ्यक्रम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक के बाद नई शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) को मंजूरी मिल गई है। 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति में बदलाव किए गए हैं।
इससे पहले 1986 में बनी शिक्षा नीति के मुताबिक हमारे देश के सभी स्कूलों में किताबी ज्ञान पर ज्यादा जोर दिया जाता था। साथ ही बच्चे के रिपोर्ट कार्ड पर एक तरफ मार्क्स तो दूसरी तरफ 'बच्चा क्लास में बात बहुत करता है, बच्चा फोकस नहीं करता, आदि' कमेंट्स लिखें जाते थे। लेकिन अब नई शिक्षा नीति के बाद रिपोर्ट कार्ड में कई बदलाव देखने को मिलेंगे।
अब खुद बच्चे भी कर सकेंगे मूल्यांकन
अब टीचर को कार्ड में लिखना होगा कि बच्चे ने कौन से स्किल हासिल किए। इतना ही नहीं बच्चे का रिपोर्ट कार्ड सिर्फ टीचर ही नहीं, बल्कि खुद बच्चा और साथ में उसके सहपाठी भी उसका मूल्यांकन करेंगे। इसके अलावा शिक्षा नीति में हुए बदलाव के मुताबिक अब स्कूल के बच्चों को 10 दिन की इंटर्नशिप भी करनी होगी।
नई शिक्षा नीति की बड़ी बातें:-
- अब स्कूल में शुरूआती 5 सालों में प्ले बेस्ड एक्टिविटीज के जरिए पढ़ाई कराई जाएगी। इसका करिकुलम एनसीईआरटी तैयार करेगा। 3 से 6 साल तक के बच्चे चाहे जो आंगनबाड़ी या प्री-स्कूल पढ़ते हो, उनका कोर्स अब खेलो-पढ़ो-सीखों पर आधारित होगा । इसके लिए शिक्षकों की खास ट्रेनिंग दी जाएगी।
- अब पहली से 5वीं तक के बच्चों ( 6 से 9 साल ) के लिए बेसिक लिट्रेसी, साक्षरता और संख्या ज्ञान पर फोकस करने के लिए नेशनल मिशन सेटअप किया जाएगा। इसके तहत कक्षा तीन तक बच्चे को फाउंडेशन लिट्रेसी को पूरा कराया जाएगा। यानी कक्षा पांच तक आते- आते बच्चे को भाषा और गणित के साथ उसके स्तर का सामान्य ज्ञान की सिखाएगा जाएगा। कक्षा 3 से ही कोर्स ऐसे तैयार किया जाएगा कि बच्चों में शुरु से ही साइंटिफिक टेम्पर डेवलप हो सके।
- वहीं, 6वीं से 8वीं के बच्चों (6 से 8 वर्ष) के लिए मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स होंगे, जो एक्टिविटीज के जरिए पढ़ाएं जाएंगे। इतना ही नहीं 6वीं के बाद से ही स्टूडेंट्स को कोडिंग सिखाई जाएगी, जिसमें 21वीं सदी के स्किल का समावेश होगा। कक्षा 6 से 12वीं तक सारे विषय पढ़ाये जाएंगे, जिसमें वोकेशनल कोर्स भी शामिल किए जाएंगे।
- नई शिक्षा नीति के मुताबिक अब स्कूल में अपना पढ़ाई के दौरान बच्चे को 10 दिन की इंटर्नशिप करनी होगी। इस इंटर्नशिप के तहत बच्चे को विषय के अनुरूप निकटतम वर्कशॉप में जाकर देखना होगा कि जिस वोकेशनल कोर्स का उन्होंने चुनाव किया है, वह काम वास्तव में कैसे होता है।
- कक्षा 9 से 12 तक के बच्चों के लिए भी मल्टी डिसिप्लिनरी कोर्स होंगे। यानी अगर बच्चा चाहे तो वह साइंस के साथ म्यूजिक ले सकता है। केमेस्ट्री के साथ बेकरी, कुकिंग जैसे विषय लेना चाहे तो ले सकेगा। इसके अलावा बच्चों की प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग पर जोर दिया जाएगा।
- नई शिक्षा नीति के तहत बालिका शिक्षा के लिए भी विशेष व्यवस्था की जाएगी। कस्तूर्बा गांधी बालिका विकास विद्यालय, वो अभी तक कक्षा 8वीं या 10वीं तक हैं। उसे कक्षा 12 तक ले जाया जाएगा।
- साथ ही बोर्ड परीक्षा के महत्व को कम करने के बहुत सारे तरीके सुझाये गए हैं। बोर्ड परीक्षा को दो भागों में बांटा जाएगा- ऑब्जेक्टिव और डिस्क्रिप्टिव। अब बोर्ड में रटे-रटाये प्रश्नों की जांच की बजाय नॉलेज के एप्लीकेशन को टेस्ट किया जाएगा।
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Wednesday, 29 July 2020
इस साल 29 नवंबर को आयोजित होगा कॉमन एडमिशन टेस्ट, 5 अगस्त से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन प्रोसेस, 16 सितंबर तक करें अप्लाय
देश में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) के पाठ्यक्रमों में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाले कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT या कैट) 2020 का इस साल के लिए शेड्यूल जारी कर दिया गया है। परीक्षा के लिए जारी शेड्यूल के मुताबिक आईआईएम कैट 2020 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रोसेस 5 अगस्त सुबह 10 बजे से लेकर 16 सितंबर 2020 शाम 5 बजे तक जारी रहेगी।
29 नवंबर को होगी परीक्षा
परीक्षा का आयोजन देखभर में 29 नवंबर को किया जाएगा। इसके अलावा कैट 2020 के लिए एडमिट कार्ड 28 अक्टूबर से परीक्षा के दिन तक यानी 29 नवंबर 2020 तक ही डाउनलोड किये जा सकेंगे। परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवार कैट 2020 का शेड्यूल और नोटिफिकेशन ऑफिशियल वेबसाइट iimcat.ac.in पर देख सकते हैं।
कैसे करें कैट 2020 के लिए रजिस्ट्रेशन?
कैट 2020 के लिए रजिस्ट्रेशन ऑफिशियल वेबसाइट iimcat.ac.in के जरिए किए जाएंगे। इसके लिए उम्मीदवारों को वेबसाइट के होम पेज पर दिए गए न्यू कैंडिडेट रजिस्ट्रेशन लिंक से अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। यह रजिस्ट्रेशन लिंक 5 अगस्त से एक्टिव किया जाएगा। जारी शेड्यूल के मुताबिक परीक्षा परिणाम जनवरी 2021 के दूसरे सप्ताह मे जारी किए जा सकते हैं। साथ ही परीक्षा का आयोजन कोरोना महामारी को ध्यान में रखते हुए ही किया जाएगा।
आईआईएम और अन्य संस्थानों में मिलता है एडमिशन
कॉमन ऐडमिशन टेस्ट के जरिए स्टूडेंट्स को देश के 20 आईआईएम और अन्य संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएट और फेलो प्रोग्राम में एडमिशन के लिए सिलेक्ट किया जाता है। साथ ही कैट के स्कोर के आधार पर सूचीबद्ध गैर-आईआईएम संस्थानों में भी प्रवेश दिया जाता है। ऐसे संस्थानों की राज्यवार लिस्ट ऑफिशियल वेबसाइट पर जारी की गई है।

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यूपी: दो दिन से लापता छात्र की हुई हत्या, पहचान छुपाने के चेहरा जलाया
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जोगिंद्रा बैंक प्रबंधक और महिला पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज
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IITs में ह्यूमैनिटीज और आर्ट्स सब्जेक्ट्स भी पढ़ाए जाएंगे, देश के सभी इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए एक कॉमन एंट्रेंस टेस्ट होगा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नई शिक्षा नीति (National Education Policy 2020) को मंजूरी दे दी गई है। 34 साल बाद देश की शिक्षा नीति में बदलाव हुए हैं। सरकार ने 2035 तक हायर एजुकेशन में 50% एनरोलमेंट का लक्ष्य तय किया है।
नई शिक्षा नीति के तहत तकनीकी संस्थानों में भी आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज के विषय पढ़ाए जाएंगे। साथ ही देश के सभी कॉलेजों में म्यूजिक, थिएटर जैसे कला के विषयों के लिए अलग विभाग स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
ऐसे कई फैसले नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट के मुताबिक लिए गए हैं। यह ड्राफ्ट इसरो के वैज्ञानिक रह चुके शिक्षाविद के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में तैयार हुआ था। जानें उन बड़े बदलावों के बारे में जो भारतीय शिक्षा की नई दिशा तय करेंगे।
भारत में कैंपस बना सकेंगी दुनिया भर की यूनिवर्सिटी
भारतीय शिक्षा प्रणाली वैश्विक स्तर पर हो रहे बदलावों को अपना सके। इसके लिए दुनियाभर की बड़ी यूनिवर्सिटीज को भारत में अपना कैंपस बनाने की अनुमति भी दी जाएगी। कैबिनेट ने एचआरडी (ह्यूमन रिसोर्स एंड डेवलपमेंट) मिनिस्ट्री का नाम बदलकर मिनिस्ट्री ऑफ एजुकेशन करने की मंजूरी भी दी है।
स्किल के साथ कला पर भी जोर देंगे तकनीकी संस्थान
नई शिक्षा नीति के मुताबिक IITs समेत देश भर के सभी तकनीकी संस्थान होलिस्टिक अप्रोच ( समग्र दृष्टिकोण) को अपनाएंगे। इसके तहत इंजीनियरिंग के साथ-साथ तकनीकी संस्थानों में आर्ट्स और ह्यूमैनिटीज से जुड़े विषयों पर भी जोर दिया जाएगा। साथ ही स्किल आधारित विषयों को भी सिलेबस में शामिल किया जाएगा।
सभी इंस्टीट्यूट के लिए एक एंट्रेंस एग्जाम
नई शिक्षा नीति में देश भर के सभी इंस्टीट्यूट में एडमिशन के लिए एक कॉमन एंट्रेंस एग्जाम आयोजित कराए जाने की बात भी कही गई है। यह एग्जाम नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कराएगा। हालांकि, यह ऑप्शनल होगा। सभी स्टूडेंट्स के लिए इस एग्जाम में शामिल होना अनिवार्य नहीं रहेगा।
क्षेत्रीय भाषाओं में भी होंगे ऑनलाइन कोर्स
स्टूडेंट्स अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी ऑनलाइन कोर्स कर सकेंगे। आठ प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं के अलावा कन्नड़, उड़िया और बंगाली में भी ऑनलाइन कोर्स लॉन्च किए जाएंगे। वर्तमान में अधिकतर ऑनलाइन कोर्स इंग्लिश और हिंदी में ही उपलब्ध हैं।
GDP का 6% शिक्षा पर खर्च होगा
नई शिक्षा नीति में GDP का 6% हिस्सा एजुकेशन सेक्टर पर खर्च किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में केंद्र और राज्य को मिलाकर GDP का कुल 4.43% बजट ही शिक्षा पर खर्च किया जाता है।
2 लाख सुझावों के बाद तैयार हुई नई शिक्षा नीति
नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को लेकर सरकार ने सुझाव भी आमंत्रित किए थे। मंत्रालय का कहना है कि इस ड्राफ्ट को लेकर 2 लाख से ज्यादा सुझाव आए। इन सुझावों का विश्लेषण करने के बाद नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई।
1986 में बनी थी शिक्षा नीति
34 साल पहले यानी 1986 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनाई गई थी। करीब तीन दशक से इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। इसकी समीक्षा के लिए 1990 और 1993 में कमेटियां भी बनाई गईं थीं।
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Tuesday, 28 July 2020
रुद्रपुर: युवक के माथे में चाबी घोंपने का मामला, पुलिस पर पथराव करने वाले 150 अज्ञात लोगों पर
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बेनेट यूनिवर्सिटी के बीए इन लिबरल आर्ट्स या बीसीए इन डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग प्रोग्राम में अभी नामांकन करवाएं
पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों की 180 साल से भी पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह ने बेनेट यूनिवर्सिटी की स्थापना की है। इसका उद्देश्य भारत के अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को प्रख्यात यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता की शिक्षा मुहैया करवाना है। उन्हें जीवन और करियर के लिए तैयार बनाना है। ग्रेटर नोएडा में स्थित यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा के सभी क्षेत्रों में छात्रों का कौशल विकास करने के साथ ही इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के माहौल को बढ़ावा दिया जाता है। भविष्य के ट्रेंड और इंडस्ट्री की डिमांड को ध्यान में रखते हुए बेनेट यूनिवर्सिटी ने छात्रों को नई दुनिया की चुनौतियों का सामना करने में समर्थ होने के लिए दो अत्याधुनिक पाठ्यक्रम लॉन्च किए हैं।
बीए इन लिबरल आर्ट्स
लिबरल आर्ट्स एजुकेशन आपको लीडरशिप के लिए प्रशिक्षित करती है
करियर के क्षेत्र में व्यापकता:
क्या आप जानते हैं कि स्टारबक्स, यू ट्यूब, एचबीओ और वाल्ट डिजनी जैसे विशाल साम्राज्य को खड़ा करने वाले सीईओ ने लिबरल आर्ट्स में पढ़ाई की है? दूसरे शब्दों में कहा जाए तो महान नेतृत्वकर्ताओं के पास बहु-आयामी स्किल होता है जिसे लिबरल आर्ट्स की पढ़ाई के जरिए प्राप्त किया जा सकता है। आपको आज के समय की लगातार बदलती दुनिया के साथ सामंजस्य बिठाने में सक्षम करने के लिए बेनेट यूनिवर्सिटी ने हाल ही में एक बीए इन लिबरल आर्ट्स प्रोग्राम लॉन्च किया है, जहां पर आप अपनी रचनात्मकता को व्यावसायिक ज्ञान के साथ जोड़कर अपना भविष्य खुद रच सकते हैं।

प्रोग्राम/विषय की विशेषताएं:
लिबरल आर्ट्स में तीन वर्षीय डिप्लोमा या एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा स्टूडेंट्स में एनालिटिकल प्रॉब्लम सॉल्विंग के लिए आंतरिक कौशल विकसित करता है जिससे उनमें अभिनव तरीके से सोचने और रचनात्मक तरीके से बातचीत करने की काबिलियत पैदा होती है। आपकी क्षमताओं और सीमाओं का विस्तार करने के लिए, बेनेट यूनिवर्सिटी में आपको प्रथम वर्ष में सायकोलॉजी, फिलॉसफी, बिजनेस स्टडी, कंप्यूटर एप्लिकेशन, मार्केटिंग, जर्नलिज्म, एडवर्टाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशन, इकोनॉमिक्स, पॉलिटिकल साइंस, इंग्लिश लिटरेचर और फाइनेंस जैसे ग्यारह अलग-अलग विषयों की मूलभूत बातों से परिचित कराया जाएगा और आप अपनी पसंद के किसी भी विषय को प्रमुख विषय के रूप में चुन सकते हैं। इतने विकल्प प्रदान करने वाली बेनेट यूनिवर्सिटी भारत की पहली यूनिवर्सिटी है।
बीसीए (डेटा साइंस) और बीसीए (क्लाउड कंप्यूटिंग और सायबर सिक्योरिटी)
ये पाठ्यक्रम इक्कीसवीं सदी के कुछ सबसे लुभावने जॉब्स के लिए आपको तैयार करते हैं। क्योंकि लगभग हर बिजनेस को ढेर सारा डेटा संभालना होता है और सभी ने क्लाउड कंप्यूटिंग के किसी न किसी प्रारूप को अपनाया है।

करियर के क्षेत्र में व्यापकता:
दुनिया तेजी से बदल रही है। पिछले कुछ सालों में आधुनिक तकनीक ने हमारे जीवन जीने, काम करने और खेल-कूद के तरीके बदल दिए हैं। हम जहां भी काम करते हैं हमारी दैनिक गतिविधियों में तकनीक का कुछ-न-कुछ दखल जरूर है। कार्यस्थल पर भी तकनीक हावी है। डेटा के साथ काम करने वाली हर कंपनी को डेटा साइंस के एक्सपर्ट्स की जरूरत पड़ेगी। आज के समय में हर कंपनी के लिए डेटा एक महत्वपूर्ण संपत्ति है और इसलिए डेटा की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। आजकल लगभग हर दूसरी कंपनी अपने डेटा के लिए क्लाउड स्टोरेज का उपयोग कर रही है। इन कंपनियों के लिए भी क्लाउड टेक्नोलॉजी और सायबर सिक्योरिटी के एक्सपर्ट्स की जरूरत पड़ेगी।
प्रोग्राम/विषय की विशेषताएं:
इस प्रोग्राम में मुख्य रूप से इंडस्ट्री की डिमांड के आधार पर भविष्य की तकनीकों पर विशेष ध्यान देने वाले पाठ्यक्रम शामिल किए जाएंगे। इस प्रोग्राम में स्टूडेंट्स क्लाउड कंप्यूटिंग, सायबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, वेब टेक्नोलॉजीस या आर्टीफिशियल इंटेलीजेंस में से कोई तीन सर्टिफिकेशन (प्रत्येक वर्ष कोई एक) चुन सकते हैं।

बेनेट यूनिवर्सिटी ही क्यों?
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आपके पैसे की सही कीमत: बेनेट यूनिवर्सिटी में प्रस्तुत पाठ्यक्रम आपके द्वारा भुगतान किए गए पैसे का सही प्रतिफल देते हैं।
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अत्याधुनिक तकनीक और शानदार इन्फ्रास्ट्रक्चर: बेनेट यूनिवर्सिटी के 68 एकड़ में फैले कैम्पस में सभी आधुनिक सुविधाएं हैं जिसमें अल्ट्रा-मॉडर्न एसी क्लासरूम और होस्टल सुविधा; एक वर्ल्ड क्लास स्पोर्ट्स सेंटर, एटीएम, फूड कोर्ट, मेस, डिस्पेंसरी, जिम के अलावा कैम्पस के भीतर बनी दो लाइब्रेरी शामिल हैं।
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इंडस्ट्री के लीडर्स और फिल्मी हस्तियों से मुलाकात: बेनेट यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट होने के अपने फायदे हैं। यहां के स्टूडेंट्स न केवल टाइम्स ऑफ इंडिया समूह में नियमित रूप से आने वाले इंडस्ट्री के लीडर्स के साथ बल्कि मूवी प्रमोशन के लिए आने वाली फिल्मी हस्तियों के साथ भी मुलाकात और बातचीत कर सकते हैं।
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अनूठा एक्सपोजर: बेनेट यूनिवर्सिटी में टेक्नोलॉजी, लॉ, मीडिया और मैनेजमेंट के क्षेत्र की सर्वोत्तम फैकल्टीज हैं जिससे स्टूडेंट्स अलग अलग डोमेन के सर्वश्रेष्ठ लोगों से मिलने-जुलने और ज्ञान प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
बेनेट यूनिवर्सिटी के इन भविष्य गामी कोर्सेस में आज ही नामांकन करवाएं और अपने उज्जवल भविष्य की सीढ़ी पर तेजी से कदम बढ़ाएं।
बेनेट यूनिवर्सिटी द्वारा पेश किए जाने वाले कोर्सेस के बारे में अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
https://www.bennett.edu.in या संपर्क नंबर - 1800 103 8484 पर कॉल करें
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ग्राफिक डिजाइन, वेब डवलपमेंट और बिजनेस रिसर्च में स्किल्स डेवलेप करने के साथ ही मंथली अर्निंग का मौका देंगी यह इंटर्नशिप्स
कोरोना की रोकथाम के लिए लगाए लॉकडाउन के चलते 31 जुलाई तक स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे। ऐसे में इस साल नया सत्र समय पर शुरू नहीं हो पाएगा। कई दिनों से घरों में बंद स्टूडेंट्स के लिए इस खाली समय को काटना भी एक चुनौती है। हालांकि, अगस्त के महीने में इंटर्नशिप के ऐसे कई अवसर हैं, जिनके जरिए आप इस समय का सदुपयोग कर नई स्किल्स को डेवलप कर सकते हैं।
इन इंटर्नशिप के जरिए स्किल डेवलपमेंट के साथ ही अर्निंग करने का भी यह अच्छा मौका है। यहां विभिन्न इंटर्नशिप्स की जानकारी के साथ ही वह लिंक भी दी गई हैं। जिनपर क्लिक कर आप इंटर्नशिप के लिए अप्लाय कर सकते हैं।
- वॉइस ओवर (इंग्लिश)
कंपनी: मून मर्चेंट डिजिटल कमपनी
कहाँ: वर्क फ्रॉम होम
वेतन: 3,000 रूपये प्रति माह
आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अगस्त 2020
यहाँ आवेदन करें: internshala.com/i/4685748
- मार्किट रिसर्च
कंपनी: गिगइंडिया
कहाँ: वर्क फ्रॉम होम
वेतन: 20,000 रूपये प्रति माह
आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अगस्त 2020
यहाँ आवेदन करें: internshala.com/i/4685749
- डिजिटल मार्केटिंग
कंपनी: हारकिन ग्लोबल सोलूशन्स
कहाँ: वर्क फ्रॉम होम
वेतन: 5,000 रूपये प्रति माह
आवेदन की अंतिम तिथि: 15 अगस्त 2020
यहाँ आवेदन करें: internshala.com/i/4685750
- मोबाइल ऍप डेवलपमेंट
कंपनी: लेटअसगोटू
कहाँ: वर्क फ्रॉम होम
वेतन: 10,000 रूपये प्रति माह
यहां आवेदन करें - internshala.com/i/4685751
आवेदन की अंतिम तिथि - 15 अगस्त 2020
- कंटेंट राइटिंग
कंपनी: जुनट्रक्स सोलूशन्स
कहाँ: वर्क फ्रॉम होम
वेतन: 6,000 रूपये प्रति माह
यहां आवेदन करें - internshala.com/i/4685752
आवेदन की अंतिम तिथि - 15 अगस्त 2020
- ऑपरेशन्स
कंपनी: परोकमार्ट
कहाँ: वर्क फ्रॉम होम
वेतन: 5,000 रूपये प्रति माह
यहां आवेदन करें - internshala.com/i/4685753
आवेदन की अंतिम तिथि - 15 अगस्त 2020
- बिजनेस रिसर्च
कंपनी: टोर्रें कैपिटल
कहां: वर्क फ्रॉम होम
स्टायपेंड: 15,000-25,000 रुपए प्रति माह
यहां आवेदन करें - internshala.com/i/4685754
आवेदन की अंतिम तिथि - 15 अगस्त 2020
- ग्राफ़िक डिज़ाइन
कंपनी: फ्यूचरिस्टिक लैब्स
कहाँ: वर्क फ्रॉम होम
वेतन: 8,000-12,000 रूपये प्रति माह
यहां आवेदन करें - internshala.com/i/4685755
आवेदन की अंतिम तिथि - 15 अगस्त 2020
- वेब डवलपमेंट
कंपनी - द विपनन कंपनी
कहां - वर्क फ्रॉम होम
स्टायपेंड - 5,000-8,000 रुपए प्रति माह
यहां आवेदन करें - internshala.com/i/4685756
आवेदन की अंतिम तिथि - 15 अगस्त 2020
- सोशल मीडिया मार्केटिंग
कंपनी - आईबीसि इन्फोमीडिया
कहां - वर्क फ्रॉम होम
स्टायपेंड - 10,000 रुपए प्रति माह
यहां आवेदन करें - internshala.com/i/4685757
आवेदन की अंतिम तिथि - 15 अगस्त 2020
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मां-बेटी हत्याकांड: शमशाद की पत्नी ने मिटाए थे सुबूत, अब हुआ ये चौंकाने वाला खुलासा
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SISTec – छात्रों के लिए एक सही करियर विकल्प
मध्य भारत में अग्रणी सागर ग्रुप के सागर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी® (SISTec) इंजीनियरिंग, फार्मेसी व मैनेजमेंट कॉलेज पिछले तीन दशकों से शिक्षा के क्षेत्र में देश व प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पहचाने जाते है। सागर ग्रुप प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में सागर ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के बैनर तले स्कूल शिक्षा में पाँच सागर पब्लिक स्कूल और टेक्नो-प्रोफेशनल शिक्षा में सिस्टेक कॉलेजों की श्रंखला में गांधी नगर व रातीबड़ कैंपस से संचालित टॉप के तीन इंजीनियरिंग कॉलेज, एक फ़ार्मेसी इंस्टीट्यूट और एक बिज़नेस स्कूल का संचालन कर रहा है । SISTec आज मध्य भारत का सबसे पसंदीदा शिक्षण गंतव्य है और औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्र में कार्यरत ग्रुप से जुड़ा और अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है ।
सिस्टेक इंजीनियरिंग छात्रों को उद्योग व कॉर्पोरेट जगत से जोड़ने के लिये जाना जाता है और इसमें प्रवेश लेने वाले छात्र कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में मशीन लर्निंग और आर्टीफिशियल इटेंलीजेंस; इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में वीएलएसआई और रोबोटिक्स; इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में एंबेडेड सिस्टम व डिज़ाइन; मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिज़ाइन और ऑटोमोबाइल; सिविल इंजीनियरिंग में डिज़ाइन और जीआईएस की विशेषज्ञता को करीब से जानेंगे व सीखेंगे। SISTec के छात्र यह विशेषज्ञता कॉलेज के आर्टीफिशियल इटेंलीजेंस लर्निंग माड्यूल; ऑनलाइन हायब्रिड व कौशल विकास ट्रेनिंग माड्यूल; फ़ेस-टू-फ़ेस कार्पोरेट व इंडस्ट्री कनेक्ट और उद्यमी इनक्यूबेटिंग इनोवेशन के माध्यम से ऑन-कैंपस व ऑनलाइन कैंपस माड्यूल से बताई जाती है । सिस्टेक गांधी नगर और रातीबड़ कैंपस के प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल, प्रोफेसर्स और फैकल्टीज की ऑनलाइन लेक्चर सीरिज़, कौशल आधारित वेबिनार्स, ई-प्रोजेक्ट्स, ई-प्लेस्मेंट, करियर काउंसलिंग व मार्गदर्शन छात्रों के मनपसंद मेंटर के रुप में उभरे है ।
ग्रुप का टेक्नो-प्रोफेशनल कॉलेज SISTec इंजीनियरिंग कॉलेज शिक्षा में बेहतरीन विकल्प है जो छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार उद्यमशीलता को बढ़ावा देता है। कॉलेज उन्हे उद्योग के शीर्ष से रचनात्मक साझेदारी व अनुसंधान और विकास से समुदायों में योगदान के लिये प्रेरित करता है । SISTec इंजीनियरिंग कॉलेज का चयन मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) भारत सरकार के मानदंडों और दिशाओं के अनुसार इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल(आईआईसी) द्वारा भी किया जा चुका और इसकी स्थापना भी कॉलेज में हो चुकी है । सिस्टेक को ईंटर्नशाला.कॉम ने नवाचार के लिये ‘मोस्ट इनोवेटिव कॉलेज’ के अवार्ड से नवाजा है और ज़ी MPCG द्वारा एक्सीलेंस इन एजुकेशन अवार्ड 2020 व बेस्ट प्लेसमेंट अवार्ड 2020 से सम्मानित भी किया गया है । SISTec को गत वर्ष करियरर्स 360 द्वारा ‘AAA’ की रेटिंग से साथ रेट किया गया है व SISTec MBA- स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज को MBA शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए 94.3 MYFM द्वारा आइकॉन ऑफ़ एक्सीलेंस के अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। सिस्टेक ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) द्वारा स्वीकृत है और राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) और बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से संबंधित मान्यता प्राप्त है।
सिस्टेक में गत वर्ष कैंपस चयन में 140+ कोर कंपनियों की उपस्थिति दर्ज की गई जिसमें छात्रों को 840+ जॉब ऑफर्स पेश किये जिसमें सर्वोच्च पैकेज 22 लाख एडोब (Adobe) का रहा । कोविद 19 के दौरान भी सिस्टेक में 16 कंपनियों ने ऑनलाइन कैंपस चयन में भाग लिया और वर्तमान बैच के छात्रों को रोज़गार के अवसर प्रदान किये जिसमे सर्वोच्च पैकेज 8 लाख रूपये का रहा । सिस्टेक में अब तक अडानी, एनआईआईटी, नेस्ले इंडिया, इन्फोसिस, एडोब, अमेज़न, सैमसंग, टीसीएस, एक्सेंचर, हिमालय, टाटा मोटर्स, डसॉल्ट सिस्टम, बॉश, एयरटेल, एआईएस, कमिंस आदि कंपनियों ने प्रमुखता से कैंपस चयन में भाग लिया और छात्रों को जॉब ऑफर पेश किये। कंपनियों ने कैंपस चयन के दौरान 762+ इंटर्नशिप के ऑफर्स सिस्टेक के इंजीनियरिंग, फार्मेसी और मैनेजमेंट के छात्रों को ऑफर किए। सिस्टेक में अब तक 90+ वेबीनार हुये जिसमें विभिन्न कंपनियों के लीडर शिप ने छात्रों के साथ संवाद किया और छात्रों के चयन मे उनका मार्ग दर्शन मे हुआ ।
सागर इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी - स्कूल बिज़नेस स्टडीज (सिस्टेक एमबीए) विभिन्न कार्यशालाओं से छात्रों को प्रशिक्षण और प्रमाणिकरण के लिए जाने जाते है । सिस्टेक-एमबीए के छात्रों को कार्यशाला द्वारा चैनेल पार्टनर के रूप में प्रमाणित किया जाता है । सिस्टेक एमबीए के छात्र वित्त, मार्केटिंग, मानव संसाधन,रीटेल प्रबंधन, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएँ में स्पेशलाइज़ेशन कर एक्सपर्ट प्रोफेशनल्स बनते है । सिस्टेक – एम. बी. ए. को 2018 में द नॉलेज रिव्यू द्वारा छात्रों के फाइनेंस स्ट्रिम को एक लाभकारी व सफल करियर बनाने व ज्ञान और कौशल के महत्वपूर्ण स्तर से फाइनेंस स्टडीज के लिए शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में शामिल किया है। सिस्टेक एम. बी. ए के कैंपस चयन में अब तक 82 कंपनियों ने भाग लिया और छात्रों को 12 लाख तक के वार्षिक ऑफर पेश किये। वर्ष 2020 मे 94.3 MYFM ने SISTec MBA- स्कूल ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज को MBA शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए आइकॉन ऑफ़ एक्सीलेंस के अवार्ड से भी सम्मानित भी किया ।
सागर इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी और टेक्नोलॉजी (सिप्टेक) फार्मेसी व मेंडिसिनेल शैक्षणिक उत्कृष्टता का केंद्र माने जाते है। सिप्टेक फार्मेसी छात्रों को अपनी रुचि के अनुसार बी.फार्म, एम फार्म – फार्मास्युटिक्स, एम फार्म फार्मास्युटिकल केमिस्ट्री आदि एकेडमिक ज्ञान के साथ-साथ इंडस्ट्री कनेक्ट व आवश्यक प्रैक्टिकल व विशेषज्ञता के लिये जाने जाते । सिप्टेक के कैंपस चयन में 63 कंपनियों ने भाग लिया और छात्रों को 7 लाख तक के वार्षिक ऑफर पेश किये ।
सिस्टेक के कैंपस एक उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे के साथ गांधी नगर हवाई अड्डे के पास व रातीबड़ कैंपस से परिचालन करता है जिसमें अत्याधुनिक कंप्यूटर लैब, उच्च स्तरीय कार्यशालाएं, सेमिनार हॉल, सुसज्जित पुस्तकालय. ई- पुस्तकालय व खेल सुविधाएं शामिल हैं । वाईफाई कनेक्टिविटी कैंपस हर सभी को नवीनतम तकनीकों के संपर्क में रहने का अवसर प्रदान करती है। संस्थान छात्रों को शैक्षणिक उत्कृष्टता की ओर प्रोत्साहित करता है और साथ मे सॉफ्ट स्किल्स, एक्स्ट्रा करिकुलर गतिविधियों के लिये प्रेरित भी करता है। सिस्टेक छात्रों को सुविधाओं के साथ छिपी क्षमता को जानने व उसे प्रदर्शित कर कॉर्पोरेट के दिग्गजों को संवाद के माध्यम से अनेक अवसर प्रदान करता हैं।
सिस्टेक एक नज़र में :
• अकादमिक उत्कृष्टता के साथ औद्योगिक प्रशिक्षण की तैयारी पर ध्यान ।
• लाइव प्रोजेक्ट्स, कॉर्पोरेट प्रशिक्षण, इंडस्ट्रियल विजिट्स और गेस्ट लेक्टर्स के माध्यम से सीखना।
• SAE, CSI, ISTE, IEEE और IIIE छात्र क्लबों के माध्यम से ग्लोबल एसोसिएशनों के साथ लाइव संवाद
• व्यक्तिगत रूप से छात्रों की मदद करने के लिए प्रभावी ट्यूटर-गार्जियन (टीजी) प्रणाली।
• छात्र की समग्र प्रगति सुनिश्चित करने के लिए अभिभावक-शिक्षक संवाद ।
• अत्याधिक योग्य, अनुभवी, समर्पित इंडस्ट्रियल ट्रेनर ।
• छात्र की शारीरिक और सामाजिक कल्याण के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों और खेल पर विशेषता पर जोर।
सिस्टेक कैंपस की सुविधाएँ:
• हरित व शांत विशाल कैंपस ।
• छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग कैंपस में छात्रावास।
• स्वच्छ और पौष्टिक भोजन प्रदान करने के लिए मेस सुविधा।
• भोपाल में सभी जगह से परिवहन सुविधा।
• इंटरएक्टिव व डिजिटल क्लासरुम ।
• आधुनिक लैब्स व वाई-फाई कनेक्टिविटी।
• जिम, स्विमिंग पूल आदि ।
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यूपी: बाइक में पेट्रोल डलवाया, फिर पैसे मांगने पर बदमाशों ने सेल्समैन को मारी गोली, जांच में जुटी पुलिस
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मध्य प्रदेश व्यापमं ने 282 पदों पर जेल प्रहरी की भर्ती के लिए मांगे आवेदन, 10 अगस्त तक करें अप्लाय, 2017 के बाद अब जारी किया नोटिफिकेशन
मध्य प्रदेश व्यापमं ने जेल प्रहरी के 282 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। राज्य सरकार ने तीन साल यानी 2017 के बाद अब यह इन भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। इन पदों के लिए आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार www.vyapam.nic.in पर ऑनलाइनअप्लाय कर सकते हैं।
यह भर्ती 282 पदों के लिए की जा रही है, जिसमें से 56 पद संविदा कर्मचारियों के लिए आरक्षित किए गए हैं। जबकि 256 सीधी भर्ती के 226 पद हैं। जेल प्रहरी के लिए अनारक्षित वर्ग के पुरुष उम्मीदवार के लिए 33 वर्ष और अनारक्षित वर्ग महिला की आयु 38 वर्ष तय है।
- योग्यता- 10वीं-12वीं
- पदों की संख्या - 282 पद (जेल प्रहरी)
- आवेदन की आखिरी तारीख- 10-08-2020
- आयु सीमा- उम्मीदवार की आयु 18 - 33 साल के अंदर होनी चाहिए।
- सिलेक्शन प्रोसेस- इसमें लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट में किए प्रदर्शन के अनुसार कैंडिडेट का सिलेक्शन होगा।
- सैलरी- 19,500 - 62,000/-
- आवेदन फीस-
- जनरल/ओबीसी- ₹500/-
- एससी/एसटी/महिला- ₹250/-
ऑफिशियल नोटिफिकेशन जारी करने के लिए यहां क्लिक करें
आवेदन करने के लिए यहां क्लिक करें
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यूपी: वाराणसी के थाने में हुई मारपीट में 27 गिरफ्तार, अब गांव में पसरा सन्नाटा, कई ने पलायन किया
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इंडिया हैकथॉन के ग्रैंड फिनाले में 10 हजार स्टूडेंट्स से रूबरू होंगे पीएम मोदी, एक से तीन अगस्त के बीच 243 टॉस्क पूरे करेंगे ये बच्चे
स्मार्ट इंडिया हैकथॉन के ग्रैंड फिनाले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अगस्त को शाम सात बजे स्टूडेंट्स से संवाद करेंगे। हर साल हैकथॉन में सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर की समस्याओं के तकनीकी समाधान दिए जाने के मौके पर पीएम स्टूडेंट्स से रूबरू होते हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री स्टूडेंट्स को आत्मनिर्भर भारत के तहत ज्यादा से ज्यादा तकनीक इजाद करने के लिए भी प्रोत्साहित करेंगे।
एक से तीन अगस्त के बीच ग्रैंड फिनाले
इस संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में AICTE अधिकारियों के साथ ग्रैंड फिनाले की तैयारियों को लेकर बैठक हुई। स्मार्ट इंडिया हैकथॉन 2020 का ग्रैंड फिनाले एक से तीन अगस्त के बीच होगा। इसमें देशभर से चुने गए दस हजार स्टूडेंट्स की टीम 243 समस्याओं का तकनीक से समाधान निकालेंगी।
4.5 लाख स्टूडेंट्स ने लिया भाग
इस प्रतियोगिता के चौथे संस्करण में 4.5 लाख स्टूडेंट्स ने भाग लिया था। पहले स्तर की स्क्रीनिंग कॉलेज लेवल में जनवरी में हुई। इसके बाद विजेता टीमों की नेशनल लेवल पर एक्सपर्ट्स और मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा स्क्रीनिंग की गई, जिसमें चयनित दस हजार स्टूडेंट्स ग्रैंड फिनाले में भाग ले रहे हैं।
तीन विजेताओं को मिलेगा पुरस्कार
इस प्रतियोगिता के तीन विजेता होंगे। पहले विजेता को एक लाख रुपये, दूसरे को 75 हजार रुपये वहीं तीसरे विजेता को 50 हजार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक समस्या के समाधान पर एक लाख रुपये का पुरस्कार भी मिलेगा।
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कुख्यात सुनील राठी तिहाड़ जेल से चला रहा गैंग, हो चुकी ये कई बड़ी वारदात, पश्चिमी यूपी में बढ़ रहा खौफ
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भारतीय स्टूडेंट्स को विदेश जाने से रोकने के लिए IIT, NIT, IISc समेत देश की टॉप इंस्टीट्यूट में बढ़ेंगी सीटें, देश में शुरू होंगे नए कोर्स और डिग्री प्रोग्राम
इस साल नए शैक्षणिक सत्र से IIT, NIT, IISc समेत शीर्ष संस्थानों की सीट में बढ़ोतरी की जाएगी। अपने चुनावी घोषणा पत्र के तहत मोदी सरकार 2024 तक इन सीटों में 50 फीसदी बढ़ोतरी कर लेगी। इतना ही नहीं विदेशों की तर्ज पर गुणवत्ता युक्त शिक्षा और रोजगार मुहैया करवाने के मकसद से बाजार की मांग के आधार पर नए कोर्सेस को भी जोड़े जाएगा।
होनहार स्टूडेंट्स को विदेश जाने से रोकना है मकसद
पिछले हफ्ते उच्च शिक्षा को लेकर मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में हुई बैठक में सीट बढ़ोतरी और इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस (IOE) की संख्या बढ़ाने पर चर्चा की गई। सीट बढ़ाने का सरकार का मकसद होनहार स्टूडेंट्स को विदेश जाने से रोकना है।
भारतीय स्टूडेंट जिन विषयों और डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई के लिए फॉरेन यूनिवर्सिटीज में दाखिला लेते हैं, वैसी ही सुविधाएं भारतीय शिक्षण संस्थानों में शुरू की जाएगी। इसके लिए IIT, NIT समेत देश के बेहतरीन संस्थानों में ऐसे कोर्स, डिग्री प्रोग्राम शुरू करने के साथ ही सीटों में भी बढ़ोतरी होगी।
मार्केट डिमांड और रोजगार देने वाले डिग्री प्रोग्राम होंगे शुरू
इस क्रम में ग्रेजुएशन प्रोग्राम में मार्केट डिमांड और रोजगार देने वाले डिग्री प्रोग्राम में सबसे ज्यादा सीटों की बढ़ोतरी होगी, जिससे स्टूडेंट्स भारत में ही रहकर उच्च शिक्षा की गुणवत्ता युक्त पढ़ाई कर सकें। आंकड़ो के मुताबिक 2019 में करीब 7 लाख 50 हजार भारतीय स्टूडेंट्स ने हायर एजुकेशन के लिए फॉरेन यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लिया था।
देश की 30 संस्थानों को IOE का दर्जा
इंस्टीट्यूट ऑफ एमिनेंस अब 30 के बजाय 50 होंगे। शुरुआत में इनकी संख्या 20 थी, जिसमें से 10 सरकारी और 10 निजी संस्थान शामिल थे। हालांकि, 2018 में इनकी संख्या बढ़ाकर 30 कर दी गई। इसके तहत अभी तक यूजीसी से 20 संस्थानों को IOE का दर्जा मिल चुका है।
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स्टे इन इंडिया और स्टडी इन इंडिया के लिए सेज यूनिवर्सिटी की अनूठी पहल
पढ़ाई के लिए विदेश जाने के इच्छुक छात्रों के लिए भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने स्टे इन इंडिया और स्टडी इन इंडिया का नया नारा दिया है। कोविड-19 के खतरे को देखते हुए विदेश जाकर पढ़ाई करना एक सुरक्षित विकल्प नहीं है। कई पेरेंट्स अपने बच्चों को विदेश भेजने से डर रहे हैं और भारत में ही अच्छी यूनिवर्सिटीज और कॉलेज की तलाश कर रहे हैं। हालांकि हमारे देश में भी एक से बढ़कर एक यूनिवर्सिटी और एजुकेशन इंस्टीट्यूट मौजूद हैं, जहां विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए कोर्सेस डेवलप किए गए हैं। मध्यभारत के अग्रणी सेज ग्रुप ने सरकार की इस मुहिम को साकार करने का बीड़ा उठाया है। सेज यूनिवर्सिटी में विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने के साथ ही इंडस्ट्री की आज और भविष्य की डिमांड को पूरा करने के लिए नए-नए कोर्सेस डेवलप किए गए हैं वहीं हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के साथ भी करार किया है। इस बारे में सेज ग्रुप की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर साक्षी अग्रवाल के साथ हमारी टीम ने खास बातचीत की और जाना कि कोविड-19 के इस दौर में भारत और खासतौर पर मध्यभारत के छात्रों के लिए वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करने और विश्व स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के लिए क्या विकल्प हैं।
सेज ग्रुप की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर साक्षी अग्रवाल के साथ खास बातचीत:
प्रश्न- 10वीं और 12वीं के रिजल्ट आ गए हैं। आगे की पढ़ाई के लिए स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता को क्या सलाह देना चाहेंगी?
साक्षी अग्रवाल- साल 2020 अनिश्चितताओं से भरा हुआ है। 12 वीं के बाद आगे की पढ़ाई और करियर को लेकर भी स्टूडेंट्स के मन में काफी दुविधा है। मैं इन स्टूडेंट्स और इनके माता-पिता को यही सलाह देना चाहूंगी कि आप लोग अपने देश और यहां के एजुकेशन सिस्टम पर भरोसा बनाकर रखिए। भारत की यूनिवर्सिटीज स्टूडेंट्स को विश्व स्तरीय शिक्षा, रिसर्च के अवसर और प्लेसमेंट प्रदान करने में सक्षम हैं। भारतीय यूनिवर्सिटीज भी आज दुनिया की बेस्ट लर्निंग प्रोसेस को अपना रही हैं और किसी से कम नहीं हैं। 10th और 12 th के बाद आप लोगों को ये देखना है कि आपके इंट्रेस्ट क्या हैं और देश की कौन सी यूनिवर्सिटी आपके इंट्रेस्ट को और बेहतर उभार सकती है। जो मध्यप्रदेश से हैं उनको मैं बताना चाहूंगी कि आप मध्यप्रदेश की यूनिवर्सिटीज को एक्सप्लोर क्यों नहीं करते। यहां पर भी आपकी रुचि के मुताबिक एक से बढ़कर एक एडवांस कोर्सेस उपलब्ध हैं।
प्रश्न- सेज द्वारा किस प्रकार के कोर्सेस लॉन्च किए गए हैं जो स्टूडेंट्स को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दक्ष बना सकते हैं।
साक्षी अग्रवाल- सेज में हमारा फोकस है कि हमारे जो स्टूडेंट्स हैं उनको हम सबसे अच्छा कैसे बना सकते हैं ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना कर सकें साथ ही इंडस्ट्री की आज और बीस साल बाद की भी डिमांड को पूरा कर सकें। हम इंजीनियरिंग से लेकर एग्रीकल्चर, डिजाइनिंग आर्किटेक्चर, लॉ, बायो साइंसेस, फोरेंसिक साइंसेस, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, बीबीए, एमबीए, बिजनेस एनालिटिक्स जैसे दर्जनों कोर्सेस और प्रोग्राम्स ऑफर करते हैं जो इंडस्ट्री की डिमांड के हिसाब से डिजाइन किए गए हैं। हम लोग बीटैक, एम टैक और पीएचडी प्रोग्राम्स भी देते हैं। हमारे अधिकांश कोर्सेस में इंडस्ट्री टाई अप्स हैं। इंडस्ट्री में जो बदलाव होते हैं उनके साथ हम अपने कोर्सेस में सुधार करते जाते हैं।
प्रश्न- आज के समय में पढ़ाई के बाद बड़ा सवाल अच्छे प्लेसमेंट का होता है। प्लेसमेंट के लिए सेज यूनिवर्सिटी अपने स्टूडेंट्स की कैसे मदद करती है?
साक्षी अग्रवाल- हमारे कोर्सेस देश और दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट दिलाने के साथ ही स्टूडेंट्स में आंत्रप्रेन्योरशिप स्किल डेवलप करने में मददगार हैं। सेज यूनिवर्सिटी ने देश और दुनिया की जानी मानी कंपनियों के साथ टाई अप किया है ताकि इंडस्ट्री के लोग यहां आकर स्टूडेंट्स को पढ़ाएं और यहां से ही वो लोग प्लेसमेंट भी ले जाएं। जैसे हुवाई, सनस्टोन, माइक्रोफोकस, अमेज़ॉन एडब्लूएस, एप्पल, रेडहार्ट टेक्नोलॉजीस इत्यादि। इन सबसे हम सर्टिफिकेशन प्रोवाइड करते हैं। इन कोर्सेस के लिए हम स्टूडेंट्स को कमर्शियल साइट्स और इंडस्ट्रीज का विजिट भी कराते हैं और इंटर्नशिप भी कराते हैं जहां पर वे थ्योरी के साथ ही इंडस्ट्री लर्निंग और प्रैक्टिकल नॉलेज भी प्राप्त करते हैं। इन इंडस्ट्रीज टाई अप से स्टूडेंट्स को इंडस्ट्री के एक्सपोजर पर आधारित एक स्ट्रॉन्ग एकेडेमिक बैकग्राउंड मिलता है जिसकी वजह से उन्हें अच्छा प्लेसमेंट मिलने में आसानी होती है। हमारी प्लेसमेंट सेल स्टूडेंट्स के लिए उनके स्किल के मुताबिक अपार्चुनिटी खोजने से लेकर कैंपस सिलेक्शन अरेंज करने और उन्हें ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू के लिए तैयार करने में भी मदद करती है।
प्रश्न- आपने कई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटीज के साथ टाई-अप किया है, ये टाई अप स्टूडेंट्स के लिए किस तरह फायदेमंद हैं, इसके अलावा और किस-किस तरह के स्किल्ड प्रोग्राम हैं जो स्टूडेंट्स को फायदा पहुंचा रहे हैं।
साक्षी अग्रवाल- सेज यूनिवर्सिटी ने यूएसए, लंदन और ताईवान जैसे देशों में कई इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के साथ टाई अप किया है। इनके साथ हम नॉलेज शेयरिंग, रिसर्च कोलैबरेशन, समर क्लासेस करते हैं सिर्फ स्टूडेंट्स के लिए ही नहीं बल्कि टीचर्स के लिए भी। स्टूडेंट्स इन यूनिवर्सिटीज में जाकर कुछ समय वहां पढ़ाई कर सकते हैं, इंटर्नशिप कर सकते हैं या फिर यहीं यूनिवर्सिटी में बैठे-बैठे ही ऑनलाइन क्लासेस के जरिए पूरे वर्ल्ड की एक्सपर्टीज पा सकते हैं। नई टेक्नोलॉजी और स्किल डेवलपमेंट के लिए हमारे पास डेटा साइंस, मशीन लर्निंग और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के लिए वर्ल्ड क्लास एप्पल सर्टिफाइड लैब है, रेड हार्ट लैब है, अमेज़ॉन एडब्लूएस लैब है, आईयूटी में क्लाउड कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी है जो स्टूडेंट्स में एडवांस ग्लोबल स्किल डेवलपमेंट के लिए मददगार हैं।
प्रश्न- आपने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के साथ भी ऑनलाइन लर्निंग को लेकर टाई-अप किया है, उसके बारे में बताइए?
साक्षी अग्रवाल- हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के साथ ऑनलाइन लर्निंग का टाई अप होना एक इंडियन एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के रूप में सेज ग्रुप की बहुत बड़ी उपलब्धि है और हम हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के बहुत शुक्रगुजार हैं। हार्वर्ड बिजनेस स्कूल द्वारा खासतौर पर सेज एल्युमनाई, सेज स्टूडेंट्स और सेज फैकल्टी मेंबर्स के लिए तेरह ऑनलाइन कोर्सेस प्रोवाइड किए जा रहे हैं। हार्वर्ड जाए बिना हार्वर्ड की फैकल्टीज से पढ़ने के लिए सेज स्कॉलरशिप के जरिए स्टूडेंट्स इसका लाभ ले सकते हैं।
प्रश्न- कोरोना काल में सेज यूनिवर्सिटी द्वारा छात्रों के लिए क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं जिससे कि वो सुरक्षित भी रहें और अपना एजुकेशन का स्तर भी ऊपर रख सकें।
साक्षी अग्रवाल- कोरोना ने पूरी दुनिया के एजुकेशन सिस्टम को बदलकर रख दिया है और नई रणनीतियां बनाने पर मजबूर किया है। हमारे लिए भी संभावनाओं के नए द्वार खुले हैं। हमने लॉकडाउन के बाद से ही पूरे कोर्सेस के टाइम टेबल ऑनलाइन बना लिए। स्टूडेंट्स के लिए जो ऑफलाइन शेड्यूल था उसे ऑनलाइन कर दिया ताकि वे घर पर रहकर ही पढ़ाई कर सकें। प्लेसमेंट और इंटरव्यू के लिए भी हमने ऑनलाइन व्यवस्थाएं की हैं। हमारा प्रयास हर कीमत पर अपने स्टूडेंट्स को वर्ल्ड क्लास एजुकेश प्रदान करना है। सेज के इंस्टीट्यूशन्स में पास इस समय 18 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। 50 हजार से ज्यादा एल्युमनाई हैं, 3500 से ज्यादा स्टाफ है। लॉकडाउन के दौरान हमने इन सबका मॉरल बनाए रखने के लिए कई ऑनलाइन सेमिनार्स किए जिनमें देश और दुनिया के जाने-माने स्पीकर्स ने अपने अपने विषय पर व्याख्यान दिए। वहीं हमने अपने लोगों के लिए स्किल डेवलपमेंट के ऑनलाइन प्रोग्राम्स भी आयोजित किए ताकि वे लॉकडाउन के दौरान कुछ नया सीख सकें। कोविड की वजह से हमने अपने आप को रोका नहीं बल्कि और आगे बढ़ने का प्रयास किया है। हमारी तरक्की के पीछे हमारे स्टूडेंट्स, एल्युमनाई, फैकल्टीज, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और हमारे शुभचिंतकों का प्यार और शुभकामनाएं हैं।
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