Friday, 25 September 2020

मेडिकल की इस फील्ड में तेजी से बढ़ रहा युवाओं का इंटरेस्ट, मेडिकल साइंस और दवाओं में इंटरेस्ट रखने वालों के लिए बेहतर करिअर ऑप्शन साबित होगा फार्मासूटिकल्स

करिअर के अलग-अलग फील्ड में इन दिनों तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर्स में हेल्थ का नाम भी जुड़ गया है। इसमें मेडिकल, पैरामेडिकल और इस सेक्टर से जुड़ी फील्ड का तेजी से विकास हो रहा है। मेडिकल साइंस और दवाओं में इंटरेस्ट रखने वालों के लिए फार्मासूटिकल्स का क्षेत्र भी एक बेहतर करिअर ऑप्शन साबित हो सकता है। विभिन्न रोगों में लाभ पहुंचा सकने वाली उपयोगी दवाओं की खोज या डेवेलपमेंट में रुचि रखने वाले लोग फार्मेसी सेक्टर से जुड़े अलग-अलग कोर्स कर इस सेक्टर में करियर बना सकते हैं।

स्कोप

  • हॉस्पिटल फार्मेसी

  • क्लिनिकल फार्मेसी

  • टेक्निकल फार्मेसी

  • रिसर्च एजेंसीज

  • मेडिकल डिस्पेंसिंग स्टोर

  • सेल्स एंड मार्केटिंग डिपार्टमेंट

  • एजुकेशनल इंस्टिट्यूट्स, हेल्थ सेंटर्स

  • मेडिकल रिप्रेजेन्टेटिव

  • क्लिनिकल रिसर्चर

  • मार्किट रिसर्च एनालिस्ट

  • मेडिकल राइटर

  • एनालिटिकल केमिस्ट

  • फार्मासिस्ट

  • ऑन्कॉलजिस्ट

  • रेग्युलेटरी मैनेजर

कोर्सेज और एलिजिबिलटी

कोर्स ड्यूरेशन एलिजिबल
डिप्लोमा इन फार्मेसी (डी.फार्मा) दो साल 12वीं पास (साइंस स्ट्रीम)
बैचलर ऑफ फार्मेसी (बी.फार्मा) चार साल 12वीं पास (साइंस स्ट्रीम)
बैचलर ऑफ फिजियोथेरपी (बीपीटी) छह माह 12वीं पास (साइंस स्ट्रीम)
मास्टर ऑफ फार्मेसी (एम.फार्मा) दो साल बी.फार्मा

प्रमुख इंस्टिट्यूट्स

  • कॉलेज ऑफ फॉर्मेसी, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

  • गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, न्यू दिल्ली

  • महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी, रोहतक

  • गुरु जंबेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार, हरियाणा

  • नैशनल इंस्टिटयूट ऑफ फॉर्मासूटिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च, मोहाली, पंजाब

  • नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मासूटिकल एजुकेशन ऐंड रिसर्च, चंडीगढ़

  • यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ फार्मासूटिकल साइंसेज, चंडीगढ़

  • बॉम्बे कॉलेज ऑफ फॉर्मेसी, मुंबई

  • इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल टेक्नॉलजी, मुंबई

  • बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, वाराणसी

फार्मासूटिकल्स फील्ड में करियर ऑप्शंस

  • रिसर्च एंड डिवेलपमेंट (R&D) : इस फील्ड में नई- नई दवाइयों की खोज और इसके विकास से जुड़े कार्य किए जा सकते हैं। R&D को जेनेरिक उत्पादों के विकास, ऐनालिटिकल R&D, ऐक्टिव फार्मासूटिकल इन्ग्रेडिएंट्स (API) या बल्क ड्रग R&D जैसी श्रेणियों में बांटा जा सकता हैं। इन सबका अपना सुपर-स्पेशलाइजेशन है।
  • ड्रग मैन्युफैक्चरिंग: यह इस फील्ड की इंपोर्टमेंट ब्रांच है। इस क्षेत्र में मॉलीक्युलर बायॉलजिस्ट, फार्मेकॉलजिस्ट, टॉक्सिकॉलजिस्ट या मेडिकल इंवेस्टिगेटर बन सकते हैं।
  • फार्मासिस्ट: हॉस्पिटल फार्मासिस्ट्स पर दवाइयों और चिकित्सा संबंधी अन्य सहायक सामग्रियों के भंडारण, स्टॉकिंग और वितरण का जिम्मा होता है, जबकि रिटेल सेक्टर में फार्मासिस्ट को एक दवा से जुड़े कारोबार में बिजनेस मैनेजर की तरह काम करना होता है।
  • क्लिनिकल रिसर्च: इसमें नई लॉन्च मेडिसिन के सुरक्षित और असरदार होने पर रिसर्च होती है। इसके लिए क्लिनिकल ट्रॉयल होता है। देश में कई विदेशी कंपनियां क्लिनिकल रिसर्च का मांग है।
  • क्वॉलिटी कंट्रोल: फार्मासूटिकल इंडस्ट्री का एक और अहम हिस्सा है। इसमें नई दवाओं की रिसर्च और डेवेलपमेंट के साथ ही यह सुनिश्चित करना होत है कि इन दवाइयों के नतीजे सुरक्षित, स्थायी और आशा के अनुरूप हैं।
  • ब्रैंडिंग एंड सेल्स: फार्मेसी की डिग्री के बाद स्टूडेंट ड्रग्स और मेडिसिन के सेल्स एंड मार्केटिंग में करियर बना सकता है। मार्केटिंग प्रोफेशनल्स उत्पाद की बिक्री के अलावा बाजार की प्रतिस्पर्धा पर भी नजर रखते हैं कि किस प्रॉडक्ट के लिए बाजार में ज्यादा संभावनाएं हैं, जिसके मुताबिक प्लानिंग की जाती है।
  • मेडिकल इन्वेस्टिगेटर: यह नई दवाइयों के टेस्टिंग और डिवेलपमेंट प्रोसेस से रिलेटिड है। हॉस्पिटल फार्मासिस्ट पर मेडिसिन और अन्य मेडिकल रिलेटेड सामग्रियों के स्टॉकिंग और डिस्ट्रिब्यूशन का जिम्मा होता है।
  • रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट: विदेशों में फार्मासिस्ट को रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट कहा जाता है। जिस तरह डॉक्टरों को प्रैक्टिस के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है, उसी तरह इन्हें भी फार्मेसी में प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस चाहिए। उन्हें रजिस्ट्रेशन के लिए एक टेस्ट पास करना होता है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने इस विषय में ट्रेनिंग के लिए 'फार्मा डी' नामक एक छह साल का कोर्स शुरू किया है।


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The trend of youth growing rapidly in this field of medicine will prove to be a better career option for those interested in medical science and medicine.


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