मानव संसाधन मंत्रालय ने 10वीं (सिर्फ नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली) और 12वीं की परीक्षा डेट शीट घोषित करने की बात कही है। लेकिन कोरोना के मौजूदा हालात के चलते इसे करवा पाना आसान नहीं है। मंत्रालय और सीबीएसई से स्थिति स्पष्ट न होने से अभिभावकों और छात्रों की चिंता बढ़ी हुई है। उनका कहना है कि पेपर देते वक्त संक्रमण का खतरा रहेगा। इसलिए क्यों न बच्चों को अगली कक्षा के लिए प्रमोट कर दिया जाए।
सख्ती के साथ खुले स्कूल
फिक्की की असिस्टेंट सेक्रेटरी जनरल शोभा मिश्रा घोष ने बताया कि एग्जाम सेंटर पर परीक्षा करवाने में संक्रमण का डर है। बच्चे को स्कूल भेजने के पहले दो बातें जरूरी हैं। स्कूल में काेई भी गतिविधियां तभी शुरू हों, जब संक्रमण का ग्राफ नीचे आए और स्कूल खुले तो सोशल डिस्टेंसिंग और सैनिटाइजेशन का सख्ती से पालन हो। क्योंकि अधिकांश स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर ऐसा है कि बैठते वक्त बच्चों की काेहनी टकराती हैं। एक तिहाई बच्चे ही स्कूल लाए जाएं। टीचिंग स्टाफ स्कूल जरूर आए ताकि ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मदद मिलती रहे।
इंटरनेशनल बोर्ड रद्द कर चुका है परीक्षाएं, बच्चों को प्रमोट करेगा
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ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन : राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि अधिकांश अभिभावक बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। ऐसे में 10वीं और 12वीं की एग्जाम लेना जोखिम भरा हो सकता है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को प्रमोट कर देना चाहिए।
- दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन : अध्यक्ष अपराजिता गौतम का कहना है कि 12वीं के नंबर से बच्चाें का भविष्य तय होता है। बच्चों का कहना है कि एडमिशन के लिए बेस्ट फोर विषय में अच्छे नंबर चाहिए होते हैं। हालांकि अभिभावक बच्चों को एग्जाम सेंटर भेजने से डरे हुए हैं। संक्रमण कम हाेने तक स्कूल नहीं खोले जाने चाहिए।
- अनऐडड रिग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स : जनरल सेक्रेटरी और दिल्ली में माउंट आबू पब्लिक स्कूल में बोर्ड मेंबर भरत अरोड़ा ने कहा कि 12वीं के अंकाें से बच्चों का भविष्य तय होता है। रही बात स्कूल खोलने की तो हम तैयारी में जुटे हैं। सरकार के निर्देश पर ही कवायद शुरू करेंगे।
- आईसीएसई बोर्ड : अधिकारियों ने कहा कि परीक्षा के संबंध में पहले भी पत्र जारी किया है। 1 मई को जारी पत्र में 10वीं और 12वीं के बचे पेपर करवाने की बात कही है। यह भी कहा है कि केंद्र सरकार के निर्देश पर ऐसा कोई कदम उठाया जाएगा।
- इंटरनेशनल बेक्लोरियट (आईबी): भारत में लॉकडाउन लगते ही 10वीं और 12वीं की परीक्षा रद्द कर इन कक्षाओं के बच्चाें को प्रमोट करने का आदेश दे चुका है।
मंत्रालय और बाेर्ड मान रहा कि संक्रमण कुछ कम हो जाएगा
मानव संसाधन मंत्रालय और सीबीएसई की तैयारी कुछ अलग है। मंत्रालय और बाेर्ड के अधिकारियों का मानना है कि जब जुलाई में 10वीं और 12वीं की परीक्षा हाेंगी, तब तक संक्रमण कुछ कम हो जाएगा। वहीं कुछ अधिकारियोें ने बताया कि शेष परीक्षा को लेकर छात्र और अभिभावक तनाव में थे। यह भी अहम है कि कोरोना में चीजें तेजी से बदल रही हैं। इसलिए जून के अंतिम हफ्ते में फिर रिव्यू किया जा सकता है कि परीक्षा करवाई जाए या नहीं। अधिकारियों ने कहा कि कई लोगों के सुझाव ये भी आए कि 10वीं-12वीं के बच्चों को प्रमोट कर दिया जाए। वहीं 12वीं के कई बच्चों के सुझाव आए कि परीक्षाएं हों ताकि उन्हें अच्छे विवि में एडमिशन के लिए अच्छे अंक का एडवांटेज मिल सके। इस बारे में दैनिक भास्कर ने मानव संसाधन मंत्रालय में स्कूल एजुकेशन विभाग की सेक्रेटरी अनीता करवाल से संपर्क किया लेकिन उन्होंने आधिकारिक तौर पर बात से मना कर दिया।
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